लेबर सेस के लिए अब हर जिले में नहीं होगा अलग खाता, योगी सरकार ने फर्मों को दी सहूलियत

लेबर सेस जमा करना अब फर्मों और उसे वसूलने वाले श्रम विभाग, दोनों के लिए आसान हो गया है। इस उपकर के लिए अब विभाग को प्रदेश के हर जिले में अब खाते का संचालन नहीं करना होगा। बीओसीडब्ल्यू बोर्ड की पहल पर बने नए पोर्टल से सेस जमा करना और कराना दोनों आसान हो गए हैं।विभागवार जमा होने वाले उपकर का पूरा डाटा भी श्रम विभाग के पास होगा। वहीं सेस जमा करने वालों को अब श्रम विभाग के दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे।दरअसल, बीओसीडब्ल्यू बोर्ड द्वारा सरकारी और गैर सरकारी निर्माणदायी संस्थानों, फर्मों, ठेकेदारों से प्रोजेक्ट की लागत का एक फीसदी लेबर सेस वसूला जाता है। श्रमिक कल्याण के लिए वसूले जाने वाले उपकर से पंजीकृत श्रमिकों के स्वास्थ्य, शिक्षा, विवाह से जुड़ी विभिन्न योजनाएं संचालित हो रही हैं। अभी तक सेस के रूप में वसूली गई राशि के हिसाब-किताब का बोर्ड के पास कोई सीधा सिस्टम नहीं था। हर जिले में इसके लिए अलग खाते का संचालन होता है। किस खाते में कितनी राशि है, यह ब्योरा भी बोर्ड को देर से मिल पाता है। इसे लेकर सीएजी ने भी सवाल उठाए थे।

बोर्ड ने दिया सेस जमा करने का बेहतर विकल्प

अब इसके लिए बोर्ड के पास नया पोर्टल है। जिसके माध्यम से ऑनलाइन सेस जमा कराने की सुविधा है। बीओसीडब्ल्यू बोर्ड की सचिव निशा अनंत का कहना है कि हम लोगों की सुविधा के लिए अभी पुरानी व्यवस्था बंद तो नहीं कर रहे लेकिन नए पोर्टल के जरिए उन्हें ऑनलाइन सेस जमा करने का बेहतर विकल्प दे रहे हैं। उपकर जमा करने वाले डेबिट या क्रेडिट कार्ड, यूपीआई, वॉलेट आदि के द्वारा पोर्टल के माध्यम से इसे डिजिटली जमा कर सकते हैं। इंडियन बैंक के सहयोग से विकसित इस ऑनलाइन व्यवस्था से लोगों को अधिक आसानी होगी। विभिन्न स्रोतों से उपकर एक ही खाते में एकत्र किया जाएगा। 75 जिलों के अलग-अलग खाते बनाए रखने की कोई आवश्यकता नहीं है।

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