
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केजरीवाल सरकार को दिल्ली को अलवर और पानीपत से जोड़ने वाली दो रैपिड रेल परियोजनाओं के लिए एक हफ्ते के भीतर भुगतान जारी करने का निर्देश दिया है। इसके साथी सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को कड़ी चेतावनी भी दी।सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी की केजरीवाल सरकार को दिल्ली को अलवर और पानीपत से जोड़ने वाली दो रैपिड रेल परियोजनाओं को एक हफ्ते के भीतर भुगतान करने को कहा साथ ही हिदायत दी कि सरकार कोर्ट को भुगतानों में चूक के लिए विज्ञापन बजट से राशि काटने संबंधी अपने पहले के आदेश को पुनर्जीवित करने का मौका न दे।शीर्ष अदालत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्रीय परिवहन निगम लिमिटेड (National Capital Regional Transport Corporation Ltd, NCRTC) की ओर से दाखिल किए गए आवेदन पर विचार कर रही थी। इसमें दिल्ली सरकार पर परियोजना के लिए भुगतान कार्यक्रम में चूक करने का आरोप लगाया गया है। समझौते के तहत केजरीवाल सरकार को दिल्ली-मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) परियोजना के लिए 415 करोड़ रुपये के बकाए का भुगतान करना था।
यही नहीं समझौते के तहत दिल्ली को राजस्थान के अलवर और हरियाणा के पानीपत से जोड़ने वाली अन्य दो रैपिड रेल परियोजनाओं के लिए 150 करोड़ रुपये के बकाए का भुगतान करना था। दिल्ली सरकार को तीनों कॉरिडोर परियोजनाओं के लिए छह साल में कुल 6,119 करोड़ रुपये का भुगतान करना था। न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए कहा- आप इस तरह बच नहीं सकते। यह बिल्कुल ठीक नहीं है। ऐसा लगता है कि आप हमें हमारा पिछला ऑर्डर जारी कराने पर विवश करेंगे।
सर्वोच्च न्यायालय ने 21 नवंबर को एक आदेश में दिल्ली सरकार को एक हफ्ते के भीतर मेरठ परियोजना के लिए 415 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया था। ऐसा नहीं होने पर इस रकम को राज्य के विज्ञापन बजट से ट्रांसफर करने की चेतावनी दी थी। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्रीय परिवहन निगम लिमिटेड (NCRTC) की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एएनएस नाडकर्णी ने कहा कि उन्हें मेरठ के लिए दिल्ली से बकाया भुगतान प्राप्त हुआ, लेकिन राज्य सरकार ने 2023-24 के लिए दिल्ली-अलवर प्रोजेक्ट के लिए 100 करोड़ रुपये और दिल्ली-पानीपत के लिए 50 करोड़ रुपये का आवंटित फंड का भुगतान नहीं किया है।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्रीय परिवहन निगम लिमिटेड (NCRTC) की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एएनएस नाडकर्णी ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान जैसे शेष राज्यों ने पहले ही अपने हिस्से का भुगतान कर दिया है। दिल्ली सरकार का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता और उड़ीसा उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एस मुरलीधर ने किया। एस. मुरलीधर (S. Muralidhar) ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि 150 करोड़ रुपये का बजटीय आवंटन मंजूरी हो गया है। अन्य दोनों परियोजनाओं को केंद्र की मंजूरी मिलने के बाद भुगतान किया जाएगा।
इस पर पीठ ने कहा- आप हर बार नए बहाने नहीं बना सकते। जब अन्य राज्य भुगतान कर सकते हैं तो आप भुगतान क्यों नहीं करेंगे… हमें हमारे पहले के आदेश (21 नवंबर के) को फिर से जारी करने के लिए मजबूर न करें। इसके साथ ही पीठ ने 150 करोड़ रुपये की राशि सात दिनों के भीतर जारी करने का निर्देश दिया। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए। उन्होंने अदालत को सूचित किया कि केंद्र को दोनों परियोजनाओं को औपचारिक मंजूरी देने में कोई समस्या नहीं है। केंद्र सरकार जल्द दोनों परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान कर देगी। एनसीआरटीसी की परियोजना रिपोर्ट केंद्र के पास विचाराधीन है।