मायावती के घर पहुंचे कांग्रेस नेता, लौटे बैरंग! BJP ने INDIA गठबंधन पर साध दिया बड़ा निशाना

उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनावी हलचल तेज होती जा रही है. बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती से मिलने पहुंचे कांग्रेस नेताओं के वापस लौटने के बाद भारतीय जनता पार्टी को विपक्षी गठबंधन पर हमला बोलने का मौका मिल गया है. इस पूरे घटनाक्रम के बाद यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है.

केशव मौर्य बोले- सपा और कांग्रेस में सिर्फ परिवारवाद समान

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्षी दलों को निशाने पर लेते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच परिवारवाद के अलावा कोई समानता नहीं है. उन्होंने दावा किया कि दोनों दलों के बीच न तो आपसी भरोसा है और न ही कोई तालमेल.

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि यह सिर्फ एक ‘अवसरवादी मेल’ है और जनता पहले ही इनके गठबंधन की सच्चाई समझ चुकी है. उन्होंने कहा कि साल 2017 में जनता इनके ‘स्वार्थी ठगबंधन’ की हवा निकाल चुकी है.

2027 में सपा-कांग्रेस का होगा सफाया: मौर्य

डिप्टी सीएम ने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की राजनीति का पूरी तरह सूपड़ा साफ हो जाएगा. उन्होंने कहा कि जनता अब समझ चुकी है कि सपा और कांग्रेस की राजनीति परिवारवाद, तुष्टीकरण और पिछड़ेपन पर आधारित है.

उन्होंने कहा कि भाजपा विकास, सुशासन, सुरक्षा और गरीब कल्याण की राजनीति कर रही है और इसी वजह से प्रदेश की जनता ने 2027 में लगातार तीसरी बार भाजपा सरकार बनाने का मन बना लिया है.

मायावती से मिलने पहुंचे थे कांग्रेस नेता

दरअसल, कांग्रेस के एससी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम और बाराबंकी सांसद तनुज पुनिया समेत कई नेता मायावती से मुलाकात करने उनके लखनऊ स्थित आवास पहुंचे थे. हालांकि, उन्हें वहां से बैरंग लौटना पड़ा.

20 मई को यह मामला सामने आने के बाद यूपी कांग्रेस संगठन के भीतर भी हलचल तेज हो गई. इस घटनाक्रम को लेकर पार्टी नेतृत्व की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई.

कांग्रेस ने कहा- दौरे की नहीं ली गई थी अनुमति

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि मायावती से मिलने के लिए पार्टी से कोई अनुमति नहीं ली गई थी. वहीं, यूपी कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडे ने बताया कि संबंधित नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है.

इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों और विपक्षी एकजुटता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं.

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