
कांवड़ यात्रा मार्ग पर दुकानों के बाहर दुकानदारों का नाम लिखाए जाने के लिए जिला प्रशासन के आदेश पर यूपी में सियासत गर्मा गई है। यूपी पुलिस के इस आदेश के बाद विपक्ष ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी है।विपक्षी दलों ने कहा है कि इससे सामाजिक सद्भाव बिगड़ेगा। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने न्यायालय से इसे स्वत: संज्ञान लेते हुए जांच कराने की मांग की है, तो बसपा सुप्रीमो मायावती ने जिला प्रशासन के इस आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग की है। मुजफ्फरनगर पुलिस प्रशासन द्वारा यह आदेश जारी किया गया है कि कांवड़ यात्रा मार्ग में पड़ने आने वाली सभी दुकानों के मालिकों को बाहर अपना पूरा नाम लिखा हुआ बोर्ड लगवाना होगा।
भाजपा सामाजिक सद्भाव की दुश्मन: अखिलेश
अखिलेश ने कहा है कि भाजपा सामाजिक सद्भाव की दुश्मन है। समाज का भाईचारा बिगाड़ने का वह कोई न कोई बहाना ढूंढती रहती है। भाजपा का उद्देश्य समाज को बांटना और परस्पर सौहार्द को क्षति पहुंचाना होता है। भाजपा की इन्हीं विभाजनकारी नीतियों के चलते प्रदेश का सामाजिक वातावरण प्रदूषित हो रहा है। कायदे से न्यायालय को इसका स्वतः संज्ञान लेना चाहिए और प्रशासन के पीछे के शासन तक की मंशा की जांच करवाकर उचित कार्रवाई करनी चाहिए। इसके पीछे सरकार की मंशा अल्पसंख्यक वर्ग को समाज से अलग बांटने और उन्हें शक के दायरे में लाने की है। जिसका नाम गुड्डू, मुन्ना, छोटू या फत्ते है, उसके नाम से क्या पता चलेगा? भाजपा सत्ता का दुरुपयोग हर स्तर पर करने में कतई संकोच नहीं करती है।अखिलेश यादव ने कहा कि वैसे भाजपा की नीति और नीयत दोनों विभाजनकारी है, जिससे जनता पूरी तरह परिचित हो चली है। अब भाजपा की चालाकी को जनता अच्छी तरह पहचानने लगी है। वह चाहे जो हथकंडा अपना ले अब उसकी साजिशें कामयाब नहीं हो सकती है। जनता खूब समझती है कि भाजपा सरकार में कानून-व्यवस्था पर संकट क्यों रहता है? ऐसे भाजपाई आदेश वस्तुतः सामाजिक अपराध हैं, जो सौहार्द के शांतिपूर्ण वातावरण को बिगाड़ना चाहते है और प्रदेश की शांति व्यवस्था को भंग करना चाहते है।जनहित में प्रशासन वापस ले फरमान: मायावती बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा है कि कांवड़ यात्रा मार्ग में स्थित दुकानदारों के मालिक व पूरा नाम दुकान के बाहर लिखवाने संबंधी आदेश अनुचित है। इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। पश्चिमी यूपी व मुजफ्फरनगर जिले में कांवड़ यात्रा मार्ग में पड़ने वाले सभी होटल, ढाबा, ठेला आदि के दुकानदारों को मालिक का पूरा नाम प्रमुखता से प्रदर्शित करने के नए सरकारी आदेश का यह गलत परम्परा है। यह सौहार्दपूर्ण वातावरण को बिगाड़ सकता है। जनहित में सरकार इसे तुरन्त वापस ले। इसी प्रकार यूपी के संभल जिला प्रशासन द्वारा बेसिक सरकारी स्कूलों में शिक्षक व छात्रों को कक्षा में जूते-चप्पल उतार कर जाने का यह अनुचित आदेश भी काफी चर्चा में है। इस मामले में भी सरकार तुरन्त ध्यान दे।