ईरान संकट से बढ़ी भारत की टेंशन, 9000 से ज्यादा भारतीय फंसे, हॉर्मुज बंद होने से LNG सप्लाई पर बड़ा खतरा

ईरान-इजरायल तनाव के बीच भारत सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। एक तरफ हजारों भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करनी है, तो दूसरी ओर ऊर्जा आपूर्ति पर मंडरा रहे खतरे से निपटना है। विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि हालात जटिल जरूर हैं, लेकिन सरकार लगातार राहत और निकासी अभियान पर काम कर रही है। मंत्रालय ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति को पूरी दुनिया के लिए चुनौतीपूर्ण बताते हुए इसे वैश्विक स्तर की गंभीर परीक्षा बताया है।

9,000 से ज्यादा भारतीयों को लेकर बढ़ी चिंता

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि ईरान में मौजूद भारतीयों की सटीक संख्या तय करना आसान नहीं है, क्योंकि कई लोग दूतावास में पंजीकरण नहीं कराते। उन्होंने कहा, ‘कुछ लोग खुद को दूतावास में रजिस्ट्रेशन नहीं कराते हैं इसलिए हमारा अनुमान 9,011 का था. उन छात्रों में से कई हमले शुरू होने से पहले लौट चुके थे. हाल ही में लगभग 882 भारतीय नागरिक, जिनमें छात्र, कुछ कारोबारी और यहां से गए तीर्थयात्री शामिल हैं, अजरबैजान और आर्मेनिया के रास्ते लौटने वाले हैं. 284 तीर्थयात्रियों में से 280 लौट चुके हैं. वे आर्मेनिया के रास्ते आए. 3-4 और एक-दो दिन में लौटेंगे.’

इस बयान से स्पष्ट है कि भारत सरकार जमीन और हवाई दोनों मार्गों से नागरिकों को सुरक्षित निकालने की योजना पर काम कर रही है। खासतौर पर मेडिकल शिक्षा के लिए ईरान गए भारतीय छात्र, जिनमें कश्मीर की छात्राओं की संख्या अधिक बताई जा रही है, सरकार की प्राथमिक चिंता बने हुए हैं।

भारतीयों की वापसी के लिए शुरू हुआ बड़ा ऑपरेशन

छात्रों की सुरक्षित वापसी को लेकर जायसवाल ने कहा, ‘हमारे पास बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स की लिस्ट है, जिनमें कश्मीर की लड़कियां भी शामिल हैं जो ईरान में मेडिकल शिक्षा ले रही हैं. हम उन्हें वापस लाने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं. हमने सभी से कहा है कि अजरबैजान सीमा तक पहुंचने से पहले दूतावास से संपर्क करें ताकि वे सीमा पार कराने में मदद कर सकें. यह जरूरी है कि जो भी भारतीय नागरिक जमीनी सीमा पार करना चाहते हैं, वे पहले हमारे दूतावास से संपर्क करें ताकि प्रक्रिया आसान हो. उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में सभी वापस घर आ जाएंगे.’

सरकार ने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए समन्वित ऑपरेशन शुरू कर दिया है और पड़ोसी देशों के रास्ते निकासी को प्राथमिक विकल्प बनाया गया है।

समुद्री क्षेत्र में बढ़ा जोखिम, भारतीय नाविकों पर भी नजर

ईरान संकट का असर समुद्री व्यापार और वैश्विक शिपिंग पर भी दिखाई देने लगा है। हॉर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के कारण समुद्री मार्ग जोखिम भरे हो गए हैं, जहां बड़ी संख्या में भारतीय नाविक कार्यरत हैं।

इस संबंध में विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘हमारे पास नाविकों का बड़ा समुदाय है, संभवतः दुनिया में सबसे बड़ा. हमारे समुद्री कर्मियों का 90 फीसदी ग्लोबल seafaring community में काम करता है. हमारे पास 22 जहाज हैं और उन 22 जहाजों पर 611 नाविक हैं. इसके अलावा क्षेत्र के अन्य हिस्सों में भी नाविक हैं. हम उनकी कंपनियों के संपर्क में है. कई नाविक लौट भी चुके हैं. उदाहरण के लिए 15 घायल नाविक भारत लौट आए हैं या जल्द पहुंचेंगे. इसी तरह क्षेत्र के अन्य हिस्सों से भी नाविक वापस आ रहे हैं.’

LNG सप्लाई पर मंडराया खतरा

यह संकट केवल मानवीय मुद्दा नहीं बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। हॉर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का अहम मार्ग माना जाता है और इसके प्रभावित होने से भारत की LNG सप्लाई पर असर पड़ सकता है।

इस मुद्दे पर जायसवाल ने कहा, ‘हालिया हमलों के कारण LNG सप्लाई प्रभावित होने वाली है. हॉर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से यह पहले ही प्रभावित हो चुकी है, लेकिन हम कई देशों के साथ बातचीत कर रहे हैं. हम वहां सभी हितधारकों के संपर्क में हैं ताकि अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित कर सकें और हमारे कार्गो की बिना रोक-टोक के आवाजाही सुनिश्चित हो सके.’

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव लंबा चलता है तो भारत में गैस और तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर औद्योगिक उत्पादन और बिजली क्षेत्र पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल सरकार की प्राथमिकता दो मोर्चों पर केंद्रित है—पहला, सभी भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी और दूसरा, ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना।

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