भारत और अमेरिका के बीच बहुचर्चित ट्रेड डील को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है. व्हाइट हाउस ने डील से जुड़े ‘फैक्ट शीट’ (तथ्य पत्र) में चुपचाप और बड़े बदलाव कर दिए हैं. दस्तावेज जारी होने के महज 24 घंटे के भीतर ही अमेरिका ने अपनी शर्तों और भाषा को बदल दिया है. सबसे बड़ा बदलाव भारत द्वारा अमेरिकी सामान खरीदने की प्रतिबद्धता को लेकर किया गया है, जिससे यह समझौता भारत के लिए थोड़ा नरम होता दिख रहा है.
‘वचन’ नहीं, अब सिर्फ ‘इरादा’
व्हाइट हाउस ने सबसे महत्वपूर्ण बदलाव उस लाइन में किया है, जो भारत की खरीद से जुड़ी थी. पहले वर्जन में लिखा था कि भारत 500 अरब डॉलर से ज्यादा के अमेरिकी सामान खरीदने के लिए “कमिट” (वचनबद्ध) करता है. लेकिन नए वर्जन में इसे बदलकर “खरीदने का इरादा रखता है” कर दिया गया है. इसका सीधा मतलब है कि भारत पर अब 500 अरब डॉलर की खरीदारी की अनिवार्य बाध्यता नहीं होगी, बल्कि यह एक योजना मात्र रह गई है.
कृषि और दालों पर भी यू-टर्न
बदलाव सिर्फ रुपयों तक सीमित नहीं हैं. उत्पादों की सूची से “कृषि” शब्द को हटा दिया गया है. इसके अलावा, पहले वाले वर्जन में टैक्स कम करने वाली लिस्ट में “कुछ दालें” शामिल थीं, जिन्हें अब नए दस्तावेज से गायब कर दिया गया है. यह भारतीय किसानों और बाजार के लिहाज से एक अहम बदलाव माना जा रहा है.
डिजिटल टैक्स हटाने की शर्त भी गायब
अमेरिका ने डिजिटल टैक्स पर भी अपने कदम पीछे खींचे हैं. पहले दस्तावेज में साफ लिखा था कि “भारत डिजिटल सर्विस टैक्स हटाएगा.” लेकिन अब नई फैक्ट शीट में यह लाइन हटा दी गई है. इसकी जगह लिखा गया है कि “भारत मजबूत द्विपक्षीय डिजिटल ट्रेड नियमों पर बातचीत करने के लिए तैयार है.” यानी अभी टैक्स हटाने की कोई पक्की गारंटी नहीं दी गई है.
ट्रंप ने हटाया 25% का एक्स्ट्रा टैक्स
डील के तहत अमेरिका ने भी बड़ा कदम उठाया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर लगाए गए 25 फीसदी अतिरिक्त आयात शुल्क (Tariff) को हटा दिया है. यह टैक्स अगस्त में इसलिए लगाया गया था क्योंकि भारत रूस से तेल खरीद रहा था. ट्रंप ने कहा कि भारत ने रूस से तेल आयात रोकने का भरोसा दिया है, जिसके बाद यह राहत दी गई है.
क्या है डील का गणित?
इस अंतरिम ट्रेड डील के तहत अमेरिका भारतीय सामान पर लगने वाला टैक्स 50% से घटाकर 18% करेगा. बदले में भारत अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों, सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन्स, ड्राई फ्रूट, वाइन और स्पिरिट्स पर टैक्स कम करेगा. दोनों देश मार्च के मध्य तक इस फाइनल डील पर साइन करने की तैयारी में हैं.