Gyanesh Kumar पर बढ़ा दबाव, विपक्ष ला रहा महाभियोग का नोटिस; SIR को लेकर EC में उठे थे 14 सवाल

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक विवाद अब और बढ़ता दिखाई दे रहा है। SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़ी एक रिपोर्ट सामने आने के बाद कांग्रेस की अगुवाई में विपक्षी दल उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में हैं। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष दोनों सदनों में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग संबंधी नोटिस देने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, नोटिस का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है और इसे जल्द संसद के दोनों सदनों में पेश किया जा सकता है।

विपक्ष तैयार कर रहा महाभियोग का ड्राफ्ट

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस की अगुवाई में विपक्षी दल महाभियोग के लिए संयुक्त रूप से नोटिस देने की तैयारी कर रहे हैं। कानूनी विशेषज्ञों की मदद से प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया जा रहा है। विपक्ष की ओर से आने वाले दिनों में लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में नोटिस दिए जाने की बात कही जा रही है।

इस बीच, विपक्ष की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग SIR से जुड़े विवाद के बीच तेज हुई है। इससे पहले भी विपक्षी दल चुनाव आयोग की भूमिका और वोटर लिस्ट से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाते रहे हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद बढ़ा विवाद

विवाद की पृष्ठभूमि में 23 सितंबर को सामने आई इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट है। रिपोर्ट के मुताबिक, तीन सदस्यीय चुनाव आयोग के भीतर SIR से जुड़े कई फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार सवाल या आपत्तियां रिकॉर्ड पर दर्ज की गईं। ये आपत्तियां चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से दर्ज किए जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है।

रिपोर्ट में बताया गया कि आपत्तियों में नए मतदाताओं को जोड़ने, नाम हटाने और बहाल करने, Form 6 में बदलाव तथा मतदाता सूची से संबंधित तकनीकी व्यवस्था जैसे मुद्दे शामिल थे। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ कदमों को “unauthorised, illegal” बताया और यह भी सवाल उठाया कि कुछ फैसले उनकी जानकारी के बिना लिए गए।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

इस रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने आंतरिक मतभेद की खबरों को लेकर अलग पक्ष रखा है। आयोग के सूत्रों के मुताबिक, SIR समेत चुनाव आयोग के सभी फैसले दोनों चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त की मंजूरी के साथ सर्वसम्मति से लिए गए। आयोग की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ पहलुओं पर अपनी चिंताएं जरूर दर्ज कराई थीं, लेकिन इन चिंताओं का मतलब अंतिम फैसलों से असहमति नहीं था।

ऐसे में एक तरफ इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज आपत्तियों का जिक्र है, जबकि चुनाव आयोग से जुड़े सूत्र सभी फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया बता रहे हैं। इसी अंतर को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

महाभियोग के प्रस्ताव को लेकर विपक्ष की तैयारी और चुनाव आयोग की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण के बीच अब आगे की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। संसद के दोनों सदनों में नोटिस दिए जाने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक और संवैधानिक बहस और तेज होने की संभावना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *