GST 2.0 Impact on FMCG: जीएसटी रिफॉर्म (GST 2.0) लागू होने के बाद बाजार में रोजमर्रा की चीज़ों के दामों में गिरावट देखी जा रही है. हालांकि, एफएमसीजी (FMCG) सेक्टर में यह सवाल उठ रहा था कि कंपनियां इस टैक्स कटौती का फायदा ग्राहकों को कैसे देंगी — कीमत घटाकर या प्रोडक्ट का वजन बढ़ाकर? अब सरकार ने इस पर स्पष्टता दे दी है, और कंपनियों ने भी अपनी तैयारी शुरू कर दी है.
अब कम दाम नहीं, ज्यादा वजन
सरकार ने यह साफ कर दिया है कि कंपनियां नए जीएसटी लाभ का फायदा प्रोडक्ट की कीमत घटाने की बजाय वजन बढ़ाकर ग्राहकों को दे सकती हैं. यानी, अब ग्राहकों को उसी कीमत पर ज्यादा मात्रा में सामान मिलेगा.
उदाहरण के लिए, अगर कोई प्रोडक्ट पहले ₹2 में बिकता था और जीएसटी कटौती के बाद उसकी नई कीमत ₹1.77 बनती है, तो कंपनियों के लिए 23 पैसे का हिसाब रखना मुश्किल होता. ऐसे में कंपनियां अब उसी ₹2 की कीमत पर 6 से 12 प्रतिशत तक ज्यादा वजन या मात्रा देने की योजना बना रही हैं.
कंपनियों की तैयारी तेज
सूत्रों के अनुसार, एफएमसीजी कंपनियां 15 नवंबर तक नए पैकिंग साइज में प्रोडक्ट लॉन्च करने की तैयारी में हैं.
- ₹2 से ₹20 के बीच बिकने वाले प्रोडक्ट्स — जैसे बिस्किट, नमकीन, शैम्पू, साबुन और स्नैक्स — पर पहले बदलाव दिखेगा.
- वहीं, महंगे प्रोडक्ट्स की कीमतों में कुछ हद तक कमी आने की संभावना है.
एक मार्केट एनालिस्ट के अनुसार, “एफएमसीजी कंपनियां छोटे पैक पर सबसे ज्यादा ध्यान देती हैं, क्योंकि इनकी बिक्री वॉल्यूम में सबसे बड़ी हिस्सेदारी होती है. इसलिए कंपनियां दाम घटाने की बजाय वजन बढ़ाकर ग्राहक संतुष्टि का संतुलन बनाए रखना चाहती हैं.”
जीएसटी 2.0 से घटे कई प्रोडक्ट्स के दाम
जीएसटी रिफॉर्म का सीधा असर कई रोजमर्रा के सामानों पर पड़ा है —
- पारले-जी बिस्किट (₹5 वाला पैक) अब लगभग ₹4.45 में मिल रहा है.
- बिस्लेरी 500 ml पानी की बोतल ₹10 की जगह ₹9 में बिक रही है.
हालांकि, कई खुदरा दुकानदार अभी भी पुराने दामों पर ही बिक्री कर रहे हैं. उनका कहना है कि छोटे सिक्कों की कमी की वजह से वे ग्राहकों से पुराना रेट ही लेते हैं और बदले में कभी टॉफी या छोटा सामान दे देते हैं. वहीं, कुछ दुकानदार अब यूपीआई पेमेंट के जरिए नए रेट पर बिक्री शुरू कर चुके हैं.
नतीजा — ग्राहक को फायदा तय
एफएमसीजी इंडस्ट्री की इस नई रणनीति से ग्राहकों को फायदा होना तय है. जीएसटी रिफॉर्म का लाभ अब या तो कीमत में कमी या मात्रा में बढ़ोतरी के रूप में उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा.