उत्तर प्रदेश के नोएडा में पुलिस ने एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है, जहां किराए के मकान से खुद को ‘अंतरराष्ट्रीय पुलिस’ बताने वाला गिरोह चल रहा था। यह गैंग न केवल नकली वर्दियां पहनता था, बल्कि विदेश में फंसे लोगों को भारत लाने, वीजा दिलाने और जमीन कब्जा छुड़ाने का दावा कर ठगी करता था। पुलिस ने इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया है।
ऐसे चला रहा था गैंग फर्जी पुलिस दफ्तर
पुलिस के अनुसार, 4 जून को सेक्टर-70 में एक घर किराए पर लेकर इस गिरोह ने ‘इंटरनेशनल पुलिस एंड क्राइम इन्वेस्टीगेशन ब्यूरो’ के नाम से ऑफिस खोल दिया। ऑफिस के बाहर पुलिस जैसे बोर्ड, पोस्टर और केंद्रीय बलों के निशान लगाए गए थे, ताकि यह वैध सरकारी कार्यालय लगे। आरोपी इंटरपोल, यूरेशियन पुलिस और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से कथित संपर्क होने का झांसा देकर लोगों को प्रभावित करते थे।
गिरोह के सदस्य और उनका बैकग्राउंड
गिरफ्तार किए गए छहों आरोपी पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं – विभाष चंद्र अधिकारी (27), अराग्य अधिकारी (26), पिंटू पाल, समापदमल (25), बाबुल चंद्र मंडल (27) और आशीष कुमार। इनमें से कुछ ग्रैजुएट और कानून की पढ़ाई कर चुके हैं, जबकि बाकी 12वीं पास हैं।
ठगी का तरीका और सबूत
गिरोह ने एक वेबसाइट (www.intlpcrib.in) बनाई थी, जहां अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के नकली सर्टिफिकेट डालकर दान जुटाने का दावा किया जाता था। इनके पास फर्जी आईडी कार्ड, अंतरराष्ट्रीय मोहरें, नकली वर्दियां, मंत्रालयों के फर्जी प्रमाण पत्र, 42,300 रुपये नकद, 9 मोबाइल फोन और 17 स्टांप सील बरामद हुई हैं।
पुलिस को ऐसे लगी भनक
डीसीपी शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि खुफिया इनपुट मिला था कि कुछ लोग खुद को पुलिस अधिकारी बताकर जमीन विवाद सुलझाने के नाम पर सौदा कर रहे हैं। छापेमारी में गिरोह के पास से भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज मिले। जांच में पता चला कि आरोपी पहले पश्चिम बंगाल में भी ऐसा ऑफिस चला चुके हैं और ब्रिटेन में दफ्तर होने का दावा करते हैं।
कई धाराओं में केस दर्ज
पुलिस ने आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), आईटी एक्ट और प्रतीक एवं नाम (अनुचित प्रयोग निवारण) अधिनियम, 1950 के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जीवाड़े के केस दर्ज किए हैं। साथ ही इनके बैंक खातों की जांच की जा रही है, जिन्हें हवाला के जरिए लेन-देन में इस्तेमाल होने का शक है।