भारत के नाम पर एक हुए कुकी और मैतेई, फुटबॉल के मैदान में बनाया देश को चैंपियन

पिछले कुछ अरसे से मणिपुर हिंसा की आग में झुलस रहा है। इसकी जड़ में है मैतेई और कुकी समुदाय के बीच का झगड़ा। इस बीच इन्हीं दो समुदाय के दो युवकों ने मणिपुर ही नहीं, बल्कि पूरे देश को गर्व से सीना चौड़ा करने करने का मौका दे दिया है।

इनमें से एक हैं भरत लारेनजम जो कि मैतेई समुदाय से आते हैं और दूसरे हैं लेविस जैंगमिन्लुन जो कुकी हैं। इन दोनों ने अपने प्रदेश में चल रहे झगड़े को दरकिनार कर भारत को अंडर-16 में दक्षिणी एशियाई फुटबॉल फेडरेशन चैंपियनशिप में ऐतिहासिक खिताबी जीत दिला दी है।

मणिपुर से टीम में 16 खिलाड़ी
खास बात यह है कि भारत की इस जीत में भरत और लेविस ने ही निर्णायक गोल किया है। इसकी बदौलत भारत ने बांग्लादेश को 2-0 से शिकस्त दे दी और रिकॉर्ड पांचवीं बार यह खिताब जीत लिया। यह भी दिलचस्प तथ्य है कि भारत को चैंपियन बनाने वाली टीम में बड़ी संख्या में खिलाड़ी मणिपुर से ही हैं। कुल 23 सदस्यों में से 16 इसी उत्तर पूर्वी प्रदेश हैं। इन 16 सदस्यों में से 11 मैतेई समुदाय से हैं और 5 कुकी समुदाय से हैं। इतना ही नहीं, जीत हासिल करने के बाद इन सभी ने प्रदेश में शांति बहाली के लिए प्रार्थना भी की। जीत से उत्साहित भरत ने कहा कि खिताबी मुकाबले में गोल करके उन्हें बहुत खुशी मिली है। भरत ने खेल शुरू होने के नौवें मिनट में ही गोल दाग लिया था।

प्रदेश के माहौल का असर टीम पर नहीं
भरत ने इसे अपना गोल ऑफ चैंपिनशिप बताया है। उन्होंने कहा कि भले ही टीम में अलग-अलग समुदाय के खिलाड़ी हैं। लेकिन हम दिल खोलकर मिलते हैं और टीम के अंदर माहौल को बेहतर बनाते हैं। भरत ने कहा कि मेरे टीममेट, मिडफील्डर लेविस ने मैच से पहले गोल करने के लिए कहा था। उसका गोल हमें टाइटल जिताने के लिए काफी अहम था। गोल के बाद मैं भागता हुआ उसकी तरफ गया और गले लगा लिया। मणिपुर में क्राइसिस पर भरत ने कहा कि उन्होंने सबकुछ सामान्य होने के लिए प्रार्थना की है। वहीं, लेविस ने कहा फाइनल के लिए मैदान पर उतरते वक्त वह काफी नर्वस थे। हालांकि जब मैंने दूसरा गोल दागा तो मेरा आत्मविश्वास लौट आया।

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