कोरोना महामारी के दौरान इंसान केवल शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी गहरे प्रभावित हुए हैं। एक ताज़ा रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि कोविड-19 ने इंसानों के दिमाग की उम्र को सामान्य से कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ा दिया है—चाहे व्यक्ति वायरस से संक्रमित हुआ हो या नहीं।
स्टडी में क्या मिला?
शोधकर्ताओं ने दिमाग की उम्र का आकलन करने के लिए MRI स्कैन का इस्तेमाल किया। 996 प्रतिभागियों के दो MRI स्कैन की तुलना की गई। पहले स्कैन, जो महामारी से पहले के थे, में कोई बड़ा अंतर नहीं मिला। लेकिन दूसरे स्कैन में पाया गया कि महामारी के बाद वाले ग्रुप में दिमाग की उम्र तेजी से बढ़ गई।
बिना कोविड संक्रमण के भी बढ़ी ब्रेन एजिंग
रिसर्च में सामने आया कि ब्रेन एजिंग केवल कोविड संक्रमण के कारण नहीं हुई, बल्कि महामारी के दौरान का तनाव, बदली हुई जीवनशैली और सामाजिक-आर्थिक असमानताएं भी इसके पीछे जिम्मेदार हैं।
उम्र और लिंग के आधार पर फर्क
- कंट्रोल ग्रुप में दिमाग सालाना लगभग 3 दिन तेज बूढ़ा हो रहा था।
- महामारी ग्रुप में यह बढ़कर 7-8 दिन प्रति वर्ष हो गया।
- कोविड संक्रमित लोगों में यह दर 9-10 दिन तक पहुंच गई।
- पुरुषों में ग्रे मैटर एजिंग महिलाओं की तुलना में अधिक पाई गई।
क्यों है यह चिंता का विषय?
शोधकर्ताओं के अनुसार, दिमाग की बढ़ती उम्र का मतलब भविष्य में याददाश्त की समस्या, अवसाद और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का बढ़ा हुआ खतरा हो सकता है। इसका समाधान केवल शारीरिक स्वास्थ्य नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और सामाजिक असमानताओं पर ध्यान देने से ही संभव है।
यह स्टडी बताती है कि कोरोना का असर केवल संक्रमण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके दीर्घकालिक प्रभाव अब भी सामने आ रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि हम स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें।
(Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है, किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें)