राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को शिक्षा व्यवस्था और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस प्रदर्शन का नेतृत्व CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने किया, जो हाल ही में भारत लौटे हैं। प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग जोर-शोर से उठाई गई। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवाओं, छात्रों और अभिभावकों ने हिस्सा लिया।
अभिजीत दीपके बोले- यह लड़ाई लंबी चलने वाली है
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि यह आंदोलन किसी एक दिन का नहीं बल्कि लंबी अवधि तक चलने वाला अभियान है। उन्होंने दावा किया कि पिछले एक महीने से सोशल मीडिया के माध्यम से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई जा रही है, लेकिन सरकार कार्रवाई करने के बजाय लोगों का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स को हैक किया गया और कई पोस्ट हटवाई गईं। इस दौरान उन्होंने कहा, “आप हमारे पोस्ट हटा सकते हैं, लेकिन हमें इस जगह से नहीं मिटा सकते.”
डिजिटलाइजेशन से पहले शिक्षकों को प्रशिक्षण देने की मांग
प्रदर्शन में शामिल 50 वर्षीय राधेश्याम कैथल ने शिक्षा और बैंकिंग क्षेत्र में बढ़ते डिजिटलाइजेशन पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ होने वाली गलत गतिविधियों और धोखाधड़ी को रोकने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
उन्होंने कहा कि बैंकिंग फ्रॉड के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है और शिक्षा क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है। उनकी मांग थी कि किसी भी डिजिटल प्रणाली को पूरी तरह लागू करने से पहले शिक्षकों और संबंधित कर्मचारियों को उचित प्रशिक्षण दिया जाए।
मणिपुर में सामान्य हो शिक्षा व्यवस्था
मणिपुर से संबंध रखने वाले और वर्तमान में नोएडा में कार्यरत 32 वर्षीय विंसन ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों से मणिपुर में हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं, जिसका सीधा असर स्कूलों और कॉलेजों पर पड़ा है।
विंसन का कहना था कि हजारों छात्र शिक्षा संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे हैं, इसलिए सरकार को जल्द से जल्द वहां शैक्षणिक माहौल को सामान्य बनाने के लिए कदम उठाने चाहिए।
प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग
प्रदर्शन में शामिल जयपुर निवासी गायत्री सिंह ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने NEET पेपर लीक का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस तरह की घटनाओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है।
उन्होंने बताया कि उनका एक रिश्तेदार कोटा में रहकर तीन वर्षों से परीक्षा की तैयारी कर रहा था, लेकिन पेपर लीक की घटनाओं ने उसका मनोबल तोड़ दिया। गायत्री ने परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय और निष्पक्ष बनाने की मांग की।
छात्रों और अभिभावकों की समस्याओं को गंभीरता से लेने की अपील
दिल्ली के 18 वर्षीय रोनक कुमार ने कहा कि शुरुआत में वह प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर असमंजस में थे, लेकिन बाद में उन्होंने खुद इसमें भाग लेने का फैसला किया।
उन्होंने कहा कि यह संगठन छात्रों और अभिभावकों से जुड़े उन मुद्दों को सामने ला रहा है, जिन पर अक्सर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। उनके अनुसार, शिक्षा व्यवस्था से जुड़े इन सवालों पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है।
मानसिक स्वास्थ्य को भी बनाया गया बड़ा मुद्दा
प्रदर्शन में मौजूद मनोवैज्ञानिक सुगंधा ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन सोशल मीडिया की सीमाओं से बाहर निकलकर लोगों को सड़कों तक लेकर आया है।
उनका कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं और शैक्षणिक दबाव के कारण कई छात्र मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं और कुछ मामलों में आत्महत्या जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं। उन्होंने इस विषय पर जवाबदेही तय करने और प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
युवाओं की बड़ी भागीदारी, गूंजे इस्तीफे के नारे
प्रदर्शन में सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया, जिनमें अधिकांश युवा और छात्र शामिल थे। कई प्रदर्शनकारी कॉकरोच मास्क पहनकर और फूल लेकर जंतर-मंतर पहुंचे। स्कूल और कॉलेज के छात्र अपने अभिभावकों के साथ भी प्रदर्शन में शामिल हुए।
इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने NEET पेपर लीक, CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में कथित गड़बड़ियों और अन्य परीक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शन स्थल पर “धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो” और “धर्मेंद्र प्रधान, इस्तीफा दो” जैसे नारे लगातार लगाए गए। इसके साथ ही “जय भीम” के नारे भी सुनाई दिए।