उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार (17 जुलाई) को गाजियाबाद दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह मुरादनगर में पूर्व मंत्री और छह बार विधायक रहे राजपाल त्यागी की प्रतिमा का अनावरण करेंगे तथा एक जनसभा को संबोधित करेंगे। राजनीतिक हलकों में इस दौरे को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में त्यागी समाज के बीच भाजपा की पकड़ मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
राजपाल त्यागी की प्रतिमा का करेंगे अनावरण
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गाजियाबाद पहुंचकर मुरादनगर में दिवंगत नेता राजपाल त्यागी की प्रतिमा का अनावरण करेंगे। इसके बाद वह जनसभा को संबोधित करेंगे।
राजपाल त्यागी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे और लंबे समय तक क्षेत्रीय राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ रही।
कांवड़ यात्रा की तैयारियों की भी करेंगे समीक्षा
जनसभा के बाद मुख्यमंत्री शाम को गाजियाबाद कलेक्ट्रेट पहुंचेंगे, जहां वह कांवड़ यात्रा की तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन के साथ समीक्षा बैठक करेंगे।
मुख्यमंत्री गाजियाबाद में ही रात्रि विश्राम करेंगे और अगले दिन बुलंदशहर, अमरोहा तथा संभल के दौरे पर रवाना होंगे।
त्यागी समाज के वोट बैंक पर भाजपा की नजर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कई विधानसभा सीटों पर त्यागी समाज का प्रभाव महत्वपूर्ण माना जाता है। मुरादनगर क्षेत्र में भी इस समुदाय की अच्छी संख्या है।
रिपोर्टों के अनुसार, भाजपा का परंपरागत माना जाने वाला त्यागी वोट बैंक पिछले कुछ समय में कुछ घटनाक्रमों के बाद प्रभावित हुआ है। ऐसे में मुख्यमंत्री का यह दौरा आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले इस वर्ग के बीच पार्टी का संदेश मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
मुरादनगर सीट पर करीब 12 प्रतिशत त्यागी मतदाता
मुरादनगर विधानसभा क्षेत्र में लगभग 12 प्रतिशत त्यागी मतदाता बताए जाते हैं, जिन्हें चुनावी दृष्टि से अहम माना जाता है।
राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार, राष्ट्रीय लोक दल (RLD) और भाजपा के गठबंधन को देखते हुए इस सीट को लेकर भी समीकरण बन रहे हैं। साथ ही जनता दल (यूनाइटेड) के पूर्व नेता के. सी. त्यागी और उनके पुत्र अमरीश त्यागी के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं।
कौन थे राजपाल त्यागी?
राजपाल त्यागी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं में शामिल रहे। वह 1989, 1991, 1996, 2002, 2007 और 2008 के उपचुनाव में विधायक चुने गए थे।
अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी सहित विभिन्न दलों से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। वह एक बार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और दो बार कैबिनेट मंत्री भी रहे।
वर्ष 2008 का उपचुनाव विशेष रूप से चर्चित रहा। 2007 में निर्दलीय विधायक बनने के बाद उन्होंने बहुजन समाज पार्टी सरकार का समर्थन किया, फिर अपनी राजनीतिक ताकत साबित करने के लिए इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
लंबी बीमारी के बाद 18 जुलाई 2025 को उनका निधन हो गया।