बिहार की राजनीति इन दिनों बड़े बदलाव के संकेत दे रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दिल्ली पहुंचने के बाद सियासी अटकलें तेज हो गई हैं। चर्चा है कि वह शुक्रवार (10 अप्रैल) को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ले सकते हैं और इसके बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इसी बीच बिहार बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता भी दिल्ली पहुंच चुके हैं, जिससे साफ है कि राज्य के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर मंथन राजधानी में ही होगा।
10 अप्रैल को बीजेपी कोर ग्रुप की अहम बैठक
दिल्ली में 10 अप्रैल को बिहार बीजेपी की कोर ग्रुप बैठक प्रस्तावित है, जिसकी अध्यक्षता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन करेंगे। इस बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर गंभीर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार पार्टी आम सहमति से उम्मीदवार तय करने की कोशिश में है ताकि नेतृत्व परिवर्तन सहज तरीके से हो सके।
कब देंगे नीतीश कुमार इस्तीफा?
सूत्रों के मुताबिक 13 अप्रैल को नीतीश कैबिनेट की आखिरी बैठक हो सकती है। इसके बाद 14 अप्रैल को नीतीश कुमार राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं। उसी दिन खरमास समाप्त होने के कारण नई राजनीतिक शुरुआत के संकेत भी देखे जा रहे हैं। यदि ऐसा होता है तो बिहार की राजनीति में लंबे समय से जारी नीतीश युग का अंत माना जाएगा।
NDA विधायक दल की बैठक और शपथ की तैयारी
संभावना जताई जा रही है कि 14 अप्रैल को ही NDA विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें नेता का चयन किया जाएगा। चुना गया नेता ही बिहार का नया मुख्यमंत्री बनेगा। सूत्रों के अनुसार 15 अप्रैल को नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है। यह भी चर्चा है कि पहली बार बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री बन सकता है।
पटना में सम्राट चौधरी के पोस्टर से बढ़ी चर्चा
राजधानी पटना में बीजेपी कार्यालय के बाहर सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाने की मांग वाले पोस्टर लगाए गए, जिससे राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गईं। हालांकि कुछ ही देर बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने पोस्टर हटा दिए। इस घटना ने संकेत दिया कि पार्टी के भीतर भी नामों को लेकर अलग-अलग राय मौजूद है।
मुख्यमंत्री की रेस में कई दिग्गज शामिल
मुख्यमंत्री पद की दौड़ में कई नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं। सबसे प्रमुख नाम डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी का माना जा रहा है, जो कोइरी समुदाय से आते हैं और बीजेपी का बड़ा ओबीसी चेहरा हैं। इसके अलावा डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा भी मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं, जिनका संघ से पुराना जुड़ाव बताया जाता है।
अन्य संभावित नामों में दिलीप जायसवाल, नित्यानंद राय, मंगल पांडे, संजीव चौरसिया, जनक राम और रमा निषाद शामिल हैं। राजनीतिक समीकरणों के आधार पर पार्टी सामाजिक संतुलन, अनुभव और चुनावी रणनीति को ध्यान में रखते हुए अंतिम फैसला ले सकती है।
सबकी नजर अब दिल्ली के फैसले पर
फिलहाल बिहार की राजनीति का केंद्र दिल्ली बन चुकी है। कोर ग्रुप बैठक के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पार्टी सम्राट चौधरी पर भरोसा जताती है या फिर किसी नए चेहरे के साथ सभी को चौंकाने वाला फैसला लेती है।