छात्रों के मनोबल को कमजोर करने की कोशिश

नीट परीक्षा का पेपर लीक होने की आशंका ने छात्रों के मनोबल को कमजोर किया है। देश में भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। सवाल यह है कि पेपर लीक को रोकना क्यों चुनौती बनता जा रहा है। क्यों एजेंसियां पेपर लीक को रोक नहीं पा रही हैं।हर साल लाखों छात्र बोर्ड परीक्षाओं, यूनिवर्सिटी परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठते हैं। मगर, अब देश की यह नियति बन चुकी है कि कोई भी परीक्षा फुल प्रूफ नहीं बन पाती है। ऐसे में देश का युवा बेहद हताश हो जाता है। एक अनुमान के अनुसार, बीते सात साल में कई राज्यों में प्रश्नपत्र लीक होने की वजह से 1.5 करोड़ से ज्यादा छात्र प्रभावित हुए। 70 से ज्यादा पेपर लीक के मामले बीते सात साल में सामने आ चुके हैं। ताजा मामला देशभर में मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए हुई नेशनल एंट्रेंस कम एलिजिबिलिटी टेस्ट की परीक्षा का है। इस परीक्षा के पेपर लीक की खबरें सामने आई हैं। वहीं, राजस्थान के सवाई माधोपुर समेत कई सेंटरों पर छात्रों ने गलत पेपर बांटने का आरोप लगाया। हालांकि, अभी आधिकारिक रूप से कुछ कहा नहीं गया है। बिहार के पटना और बिहार शरीफ के साथ-साथ झारखंड के रांची में भी छापेमारियां हुई हैं। मामले में पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में भी लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। बीते रविवार को हुई इस परीक्षा के लिए 24 लाख छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जिसमें से 23.3 लाख इस परीक्षा में बैठे। बिचौलियों, शिक्षा माफियाओं की एंट्री और यूनिवर्सिटी-कॉलेज प्रशासन के कुछ लोभी लोगों के शामिल होने से पेपर लीक के मामले बढ़े हैं, जिनका मकसद हर हाल में सिर्फ पैसे कमाना होता है। ये लालची लोग होते हैं। सारा खेल भर्ती परीक्षा के केंद्रों के अलॉटमेंट में होता है। शिक्षा माफिया इसी के जरिए अपना हित साधते हैं। ये पेपर लीक करके मुंहमांगी कीमत पर छात्रों को बेचते हैं। बीते कुछ सालों में तो यह काफी बढ़ा है। राजस्थान में बीते कुछ सालों से पेपर लीक कई मामले सामने आ चुके हैं। 2015 से लेकर 2023 तक कई प्रतियोगी परीक्षाओं के 14 पेपर लीक मामले सामने आ चुके हैं। यूपी में भी पेपर लीक के मामले अक्सर सुनाई दे जाते हैं। सरकार भले ही फुलप्रूफ परीक्षा कराने के बड़े-बड़े दावे करती रही हो, मगर परीक्षाओं को लीक होने से नहीं रोक पा रही है। 2017-2024 के बीच उत्तर प्रदेश में पेपर लीक के कम से कम 10 मामले सामने आ चुके हैं। कुछ राज्यों में पेपर लीक तो चुनावी मुद्दा भी बन गया। बिहार में भी पेपर लीक राजनीतिक मुद्दा बना। इसी साल फरवरी में संसद ने लोक परीक्षा विधेयक, 2024 पारित कर दिया। इस विधेयक में सरकारी भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और फर्जी वेबसाइट जैसी अनियमितताओं के खिलाफ नकेल कसी गई है।

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