ढाका। बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट के हाई कोर्ट डिवीजन में हाल ही में 25 अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति की गई है, लेकिन इनमें से एक भी व्यक्ति अल्पसंख्यक समुदाय से नहीं है। इस पर बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद (BHBCUC) ने गहरी निराशा और चिंता व्यक्त की है।
अल्पसंख्यकों की पूर्ण अनुपस्थिति पर आपत्ति
परिषद की ओर से जारी बयान में कहा गया –
“नवनियुक्त न्यायाधीशों में धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यक समुदायों का प्रतिनिधित्व पूरी तरह से नदारद है। यह बेहद खेदजनक और चिंताजनक है, जबकि अल्पसंख्यक देश की आबादी का लगभग 10% हिस्सा हैं।”
इन 25 नियुक्तियों में 9 न्यायिक अधिकारी, 9 वकील और 7 विधि अधिकारी शामिल किए गए हैं।
राष्ट्रपति ने की नियुक्ति, हाई कोर्ट जजों की संख्या 113 हुई
स्थानीय मीडिया के अनुसार, बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने चीफ जस्टिस सैयद रेफात अहमद की सलाह पर सोमवार देर रात इन नियुक्तियों को मंजूरी दी। इसके बाद हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 113 हो गई। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश ने सभी नए जजों को शपथ दिलाई।
राजनीतिक रसूख वाले नाम भी शामिल
नियुक्त जजों में उप अटॉर्नी जनरल लुत्फुर रहमान का नाम भी है, जिन्हें हाल ही में नेशनल सिटिजन पार्टी से जुड़ी राजनीति के चलते पदोन्नत किया गया था। रहमान, पार्टी के मुख्य समन्वयक सरजिस आलम के ससुर भी हैं।
न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल
प्रोथोम आलो की रिपोर्ट के मुताबिक, विपक्षी दलों और मानवाधिकार संगठनों ने इन नियुक्तियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि न्यायपालिका अब “भीड़तंत्र” के अधीन होती जा रही है। उनका आरोप है कि सरकार समर्थित हमलों और राजनीतिक दबाव के चलते वकील और न्यायाधीश स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पा रहे।
परिषद के अध्यक्ष निम चंद्र भौमिक, कार्यकारी अध्यक्ष उषातन तालुकदार, वरिष्ठ उपाध्यक्ष निर्मल रोजारियो और महासचिव मोनिंद्र कुमार नाथ ने इस मामले को न्यायपालिका की पारदर्शिता और लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है।