खामेनेई की हत्या पर भारत चुप क्यों? ओवैसी ने PM मोदी के इजरायल दौरे पर उठाए गंभीर सवाल

अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद जहां मिडिल ईस्ट (Middle East) भयंकर युद्ध की आग में जल रहा है, वहीं भारत में भी इस पर सियासी घमासान शुरू हो गया है। AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने इस हमले को ‘अमानवीय और अनैतिक’ करार देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया इजरायल दौरे (25-26 फरवरी) की टाइमिंग पर बेहद तीखे और गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

ओवैसी की मोदी सरकार से स्पष्ट डिमांड:

शनिवार को एक कार्यक्रम के दौरान ओवैसी ने कड़ा रुख अपनाते हुए मांग की कि भारत सरकार को तुरंत खामेनेई की इस ‘गैरकानूनी हत्या’ की कड़ी निंदा करनी चाहिए।

  • ‘ईरान चुप कैसे रहेगा?’ ओवैसी ने कहा कि खामेनेई शिया मुसलमानों के सर्वोच्च नेता थे। रमजान के इस पवित्र महीने में उनकी हत्या करके यह उम्मीद कैसे की जा सकती है कि ईरान खामोश बैठेगा?
  • शांति वार्ता को किया बर्बाद: उन्होंने आरोप लगाया कि जेनेवा में ईरान-अमेरिका की बातचीत सफलता के बेहद करीब थी, लेकिन अमेरिका ने जानबूझकर इसे रोककर इजरायल के साथ मिलकर यह विनाशकारी हमला कर दिया।

PM मोदी के इजरायल दौरे पर ओवैसी के 3 चुभते हुए सवाल:

ओवैसी ने पीएम मोदी की 25-26 फरवरी की इजरायल यात्रा (जिसमें रक्षा और व्यापार समझौते हुए) और ठीक दो दिन बाद 28 फरवरी को हुए हमले को जोड़ते हुए कई कूटनीतिक सवाल दागे:

  1. सुरक्षा पर सवाल: “अगर इस हमले के दौरान भारत के प्रधानमंत्री का विमान हवा में होता, तो क्या होता? इजरायल ने पीएम मोदी की यात्रा का गलत फायदा उठाया है।”
  2. धोखा या सहमति? “अगर नेतन्याहू ने इस हमले की जानकारी पहले ही दे दी थी, तो पीएम मोदी को अपनी यात्रा तुरंत रोक देनी चाहिए थी। और अगर जानकारी नहीं दी गई, तो यह भारत के साथ बहुत बड़ा धोखा है।”
  3. तटस्थ नीति खत्म: ओवैसी ने दावा किया कि भारत की पिछले 80 सालों से चली आ रही ‘तटस्थ विदेश नीति’ (Neutral Foreign Policy) अब पूरी तरह से नाकाम हो चुकी है और दुनिया को लग रहा है कि हमने एक पक्ष (इजरायल) चुन लिया है। ‘विश्वगुरु’ बनने के इस मौके पर हमारी चुप्पी नुकसानदेह है।

‘एक करोड़ भारतीयों की जान और तेल की कीमतों पर मंडराया खतरा’

ओवैसी ने भारत के आर्थिक और कूटनीतिक हितों पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि खाड़ी देशों में करीब 1 करोड़ भारतीय काम करते हैं, जो देश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देते हैं।

  • इस युद्ध से कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छूने लगेंगी, जिसका सीधा और भारी नुकसान भारत को उठाना पड़ेगा।
  • दुबई जाने वाली कई उड़ानें रद्द हो गई हैं और ईरान के साथ-साथ मक्का-मदीना जाने वाले कई भारतीय मुसलमान वहां बुरी तरह फंस गए हैं।

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