अक्षत त्रिपाठी मामले में CJI की फटकार के बाद पुलिस का बड़ा बयान, DM को लेकर दावे पर दी सफाई

ग्रेटर नोएडा में गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी के छात्र अक्षत त्रिपाठी को CJP प्रदर्शन में शामिल होने के मामले में नोटिस जारी किए जाने के बाद विवाद बढ़ गया है। भारत के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की कड़ी टिप्पणी के बाद अब ग्रेटर नोएडा पुलिस ने पूरे मामले पर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। पुलिस ने कहा है कि इस प्रकरण में गौतमबुद्धनगर के जिलाधिकारी का कोई संबंध नहीं है और संबंधित नोटिस को पहले ही निरस्त किया जा चुका है।

अक्षत त्रिपाठी को क्यों जारी किया गया था नोटिस?

दरअसल, CJP प्रदर्शन के दौरान अक्षत त्रिपाठी पर कॉलेज का माहौल खराब करने का आरोप लगाया गया था। इकोटेक-1 थाना पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर छात्र के खिलाफ नोटिस जारी किया गया था। इसमें उसे 5 लाख रुपये का बॉन्ड जमा करने के लिए कहा गया था।

हालांकि, मामले के उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद 5 सितंबर 2026 को इस नोटिस को निरस्त कर दिया गया। अब ग्रेटर नोएडा के डीसीपी की ओर से जारी बयान में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस नोटिस का गौतमबुद्धनगर के जिलाधिकारी से कोई संबंध नहीं था।

सौरव दास ने क्या दावा किया था?

मामले के बीच कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी किया था। 8 सितंबर को दास ने लिखा था- क्या गौतम बुद्ध नगर के DM ने सुप्रीम कोर्ट का 1 सितंबर का ऐतिहासिक आदेश नहीं पढ़ा है? CJP विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने वाले प्रदर्शनकारियों को कानूनी कार्रवाई से छूट मिली हुई है.

दास ने लिखा था- अक्षत त्रिपाठी को 5 लाख रुपये का जमानत बॉन्ड भरने की जरूरत नहीं है. हमने केंद्र सरकार से कहा है कि वे तुरंत इसके अनुसार कार्रवाई करें और DM को फैसले की एक कॉपी भेजें. हम किसी भी छात्र को निशाना नहीं बनने देंगे.

डीसीपी ग्रेटर नोएडा ने क्या कहा?

सौरव दास के बयान के बाद ग्रेटर नोएडा पुलिस की ओर से भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर स्पष्टीकरण जारी किया गया। डीसीपी ग्रेटर नोएडा ने कहा- सन्दर्भित प्रकरण में संज्ञानित करना है कि अक्षत त्रिपाठी को कार्यालय मजिस्ट्रेट तृतीय द्वारा धरना प्रदर्शन को दृष्टिगत रखते हुए अन्तर्गत धारा 126/135 बीएनएसएस के क्रम में धारा 130 का नोटिस शांति व्यवस्था बनाये रखने हेतु बॉन्ड पेपर 4.9.2026 को जारी किया गया था. मामले के उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आते ही 5.9.2026 को त्रुटिपूर्ण नोटिस को निरस्त कर दिया गया था.

पुलिस के बयान के मुताबिक, गलत नोटिस जारी किए जाने और इस मामले में बरती गई लापरवाही को लेकर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई पहले ही शुरू की जा चुकी है।

डीसीपी ने आगे स्पष्ट किया कि गौतमबुद्धनगर में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू है। इसी वजह से संबंधित नोटिस कार्यालय मजिस्ट्रेट तृतीय, गौतमबुद्धनगर की ओर से जारी किया गया था। पुलिस के अनुसार, जिलाधिकारी गौतमबुद्धनगर का इस पूरे प्रकरण से कोई संबंध नहीं है।

अधिसूचना में क्या प्रावधान किया गया था?

पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था से जुड़े प्रावधानों को लेकर साल 2020 की एक अधिसूचना का भी जिक्र सामने आया है। उस समय तत्कालीन आईएएस अधिकारी अवनीश अवस्थी के अपर मुख्य सचिव रहते हुए गृह पुलिस अनुभाग (6) की ओर से अधिसूचना जारी की गई थी।

इसमें बताया गया था कि BNSS से संबंधित शक्तियां पुलिस कमिश्नरेट के तहत पुलिस अधिकारियों को सौंप दी गई हैं। अधिसूचना के मुताबिक, पुलिस कमिश्नरेट वाले क्षेत्रों में जिलाधिकारी को BNSS, जिसे पहले CrPC के नाम से जाना जाता था, के तहत कुछ आदेश जारी करने का अधिकार नहीं है।

अधिसूचना में कहा गया था- दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (अधिनियम संख्या 2 सन् 1974) की धारा 20 के अधीन शक्तियों का प्रयोग करके राज्यपाल अधिनियमों के संबंध में पुलिस आयुक्त को कार्यपालक मजिस्ट्रेट और अपर जिला मजिस्ट्रेट की शक्तियों तथा जिला मजिस्ट्रेट की शक्तियां प्रदत्त करतीं हैं. उक्त अधिनियम की धारा 21 के अधीन राज्यपाल अग्रतर आदेशों तक दंड प्रक्रिया संहिता 1973 (अधिनियम संख्या दो सन् 1974) की धारा-58, अध्याय आठ तथा अध्याय दस के प्रयोजनों के लिए लखनऊ (नगर) और जिला गौतमबुद्ध नगर में तैनात संयुक्त पुलिस आयुक्त, अपर पुलिस आयुक्त, उप पुलिस आयुक्त,अपर उप पुलिस आयुक्त और सहायक पुलिस आयुक्त को कार्यपालक मजिस्ट्रेटों की शक्तियां प्रदत्त करती हैं.

क्या है अक्षत त्रिपाठी का पूरा मामला?

यह विवाद उस समय सामने आया जब चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस सूर्य कांत ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने वाले गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी के छात्र अक्षत त्रिपाठी को एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की ओर से नोटिस जारी किए जाने पर नाराजगी जताई।

CJI ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश स्पष्ट था और किसी भी छात्र के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। सुनवाई के दौरान CJI ने टिप्पणी की, ‘मजिस्ट्रेट की हिम्मत कैसे हुई नोटिस जारी करने की? कोई मजिस्ट्रेट हमारे आदेशों का उल्लंघन कैसे कर सकता है?’

सुप्रीम कोर्ट ने मजिस्ट्रेट से स्पष्टीकरण मांगने की बात कही

अक्षत त्रिपाठी को यह नोटिस 4 सितंबर को BNS की धारा 130 के तहत जारी किया गया था। यह कार्रवाई असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस की रिपोर्ट के बाद हुई थी। नोटिस में आरोप लगाया गया था कि अक्षत छात्रों को विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसा रहा था।

नोटिस में यह भी आरोप लगाया गया था कि अक्षत सरकार-विरोधी और गुमराह करने वाली जानकारी फैला रहा था। इसके तहत उससे 5 लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड और दो स्थानीय जमानतदार पेश करने को कहा गया था।

मामले की सुनवाई के दौरान छात्र के वकील ने अदालत को बताया कि नोटिस भले ही वापस ले लिया गया हो, लेकिन इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करते हुए जारी किया गया था। वकील ने इसे कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट का मामला बताया।

इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि अदालत संबंधित मजिस्ट्रेट से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगेगी। अब ग्रेटर नोएडा पुलिस के स्पष्टीकरण के बाद इस मामले में जिलाधिकारी की भूमिका को लेकर लगाए जा रहे दावों पर भी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *