नई दिल्ली: उत्तर भारत के पर्यावरण का सुरक्षा कवच मानी जाने वाली देश की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला ‘अरावली’ के अस्तित्व को बचाने के लिए नेशनल यूथ कांग्रेस ने एक बड़े आंदोलन का ऐलान कर दिया है। संगठन ने नए साल में ‘अरावली सत्याग्रह’ शुरू करने का फैसला किया है। यह ऐतिहासिक यात्रा 7 जनवरी से शुरू होकर 20 जनवरी 2026 तक चलेगी। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली होते हुए करीब 1,000 किलोमीटर का लंबा सफर तय करेंगे और लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करेंगे।
सरकार पर संस्कृति और पर्यावरण को नष्ट करने का आरोप
इस यात्रा की घोषणा करते हुए नेशनल यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने केंद्र सरकार पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने भाजपा सरकार पर पर्यावरण विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार खनन माफियाओं को फायदा पहुंचाने के लिए प्रकृति की बलि दे रही है। उदय भानु चिब ने अपने बयान में कहा, “अरावली डेढ़ अरब साल पुरानी है. यह सिर्फ पहाड़ नहीं हैं, बल्कि उत्तर भारत का सुरक्षा कवच हैं. इन्हें खत्म करना आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है.” उन्होंने आगे कहा कि भाजपा सरकार ने पहले भारत की शाश्वत संस्कृति को प्रदूषित किया और अब देश के पर्यावरण को बर्बाद करने पर तुली हुई है।
100 मीटर की ऊंचाई वाले नियम पर विवाद
यूथ कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट की अवहेलना का भी आरोप लगाया है। संगठन का दावा है कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में प्रस्ताव दिया है कि 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को अरावली की परिभाषा से बाहर रखा जाए। कांग्रेस का कहना है कि यह ‘100 मीटर का पैंतरा’ सिर्फ इसलिए लाया गया है ताकि बड़े पैमाने पर खनन को वैध बनाया जा सके। आरोपों के मुताबिक, राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को दरकिनार करते हुए हाल ही में 50 नई माइनिंग लीज जारी कर दी हैं और साल 2010 से बंद पड़ी खनन गतिविधियों को भी बिना किसी ठोस प्रस्ताव के दोबारा शुरू कर दिया गया है।
तीन सूत्रीय मांगों को लेकर होगा सत्याग्रह
इस सत्याग्रह के जरिए यूथ कांग्रेस ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली मांग यह है कि 100 मीटर की ऊंचाई वाला नियम पूरी तरह खत्म किया जाए। दूसरी, पूरे अरावली क्षेत्र को ‘क्रिटिकल इकोलॉजिकल जोन’ घोषित किया जाए और तीसरी, अवैध और मनमानी खनन गतिविधियों पर तुरंत रोक लगाई जाए। संगठन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने केवल रेयर अर्थ मिनरल्स की सीमित माइनिंग की बात कही थी, लेकिन सरकार इसकी आड़ में संसाधनों को अपने करीबी लोगों को सौंप रही है। इस यात्रा को हाइब्रिड मोड में आयोजित किया जाएगा, जिसमें नेता, पर्यावरणविद और आम नागरिक बड़ी संख्या में हिस्सा लेंगे।