
मेरठ का ज्वेलरी उद्योग प्रदेश में एक बड़ी अहमियत रखता है। एक तथ्य यह भी है कि प्रति वर्ष यहां की ज्वेलरी उद्योग का टर्नओवर 2000 करोड़ से अधिक होता है और 40 हजार से ज्यादा स्वर्णकार, रत्नकार व आभूषण विक्रेता इस उद्योग के अंतर्गत कार्य कर रहे हैं। इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर मेरठ में वर्ष 2016 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ज्वेलरी टेक्नोलॉजी (एनआईजेटीएम) की स्थापना भी की गई थी।भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर होगा निर्माण
काफी वक्त से मेरठ के रत्नों व स्वर्णाभूषण उद्योगों की मांग रही है कि यहां के पारंपरिक सर्राफा बजार को विस्तारित करने की जरूरत है। ऐसे में, सीएम योगी का नया प्रयास इस मांग की पूर्ति करने के साथ ही भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर न केवल इस उद्योग बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी रोजगार समेत तमाम नए अवसर उत्पन्न करने का माध्यम बनेगा। इससे, यह क्षेत्र ज्वेलरी उद्योग के एक विस्तारित हब के रूप में विकसित होगा जहां दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा व फरीदाबाद समेत हरियाणा के विभिन्न क्षेत्रों से उद्योगपति व आम नागरिक यहां ज्वेलरी की खरीदारी करने आ सकेंगे।मॉडर्न ट्रंक फैसिलिटीज का माध्यम बनेगा फ्लैटेड फैक्टरी कॉम्पलेक्स
परियोजना के अंतर्गत, फ्लैटेड फैक्टरी का कॉम्पलेक्स मॉडर्न ट्रंक फैसिलिटीज व प्लग एंड प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर से युक्त होगा।इस कॉम्पलेक्स का निर्माण स्टेट ऑफ द आर्ट ऑटोमेशन युक्त किया जाएगा, जो इसे वर्ल्ड क्लास एमिनिटीज युक्त बनाएगा। यह मेरठ व वेदव्यास पुरी के विकास और उन्नति के अनंत अवसर उत्पन्न करेगा।कॉम्पलेक्स को लिफ्ट सिस्टम, इंटेलिजेंट सिक्योरिटी, लाइटिंग व पार्किंग सिस्टम से युक्त किया जाएगा।परियोजना के अंतर्गत, बनने वाले फ्लैटेड फैक्टरी कॉम्पलेक्स में कॉमन एग्जिबिशन व कॉन्फ्रेंस वेन्यू भी होंगे।कॉम्पलेक्स को सस्टेनेबिलिटी के आधुनिक प्रतिमानों के अनुरूप बनाया जाएगा और यूनिवर्सल गवर्नेंस इंटरफेस युक्त किया जाएगा।इस परिसर में रत्न व स्वर्णाभूषण उद्योग से जुड़े उद्यमियों के शो रूम व कारखाने होने के साथ ही नॉन पॉल्यूटिंग स्टार्टअप्स व सेक्टर्स को भी जगह मिलेगी।