लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे की राह में ‘किसान पथ’ का पेंच, अब सीएम योगी लेंगे निर्णय

आगरा एक्सप्रेसवे को लखनऊ में किसान पथ के जरिए पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने में बड़ी चुनौती है। यूपी सरकार ने कहा है कि निर्माणाधीन किसान पथ को छह लेन कर इसे दोनों एक्सप्रेसवे से जोड़ने की राह निकाली जाए।पर यूपीडा ने कहा कि किसान पथ से जोड़ना खासा मुश्किल है। इसके बाद शासन ने किसान पथ व बाकी दो विकल्पों पर पूरी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को भेज दी गई है। अब मुख्यमंत्री योगी को इस पर निर्णय लेना है कि तीनों में किसे प्रस्ताव को मंजूरी देते हैं।असल में यूपीडा ने शासन को दो विकल्प का प्रस्ताव भेज कर संस्तुति की थी कि विकल्प नंबर एक उपयुक्त है और इसे मंजूरी दी जाए। इस पर मुख्यमंत्री कार्यायल से कहा गया कि किसान पथ से भी प्रस्तावित लिंक एक्सप्रेसवे जोड़ा जा सकता है। इस पर यूपीडा ने पिछले माह शासन को भेजे पत्र में कहा है कि किसान पथ 120 किमी की रफ्तार के हिसाब से डिजाइन नहीं किया गया है। इस पर कई जगह से प्रवेश व निकास होता है। इसके जरिए जोड़ने में नए इंटरचेंज के लिए अतिरिक्त जमीन की जरूरत होगी जो बहुत महंगी होगी। इसके लिए किसान पथ पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से नहीं जुड़ा है। इसके लिए शहर के बीच से गुजरना होगा। लखनऊ में 104 किमी की निर्माणाधीन आउटर रिंग रोड को किसान पथ के नाम से जाना जाता है। पर शासन का कहना है कि क्या किसान पथ का स्ट्रक्चरल ढांचा इस तरह का है, इसके दोनों ओर एक-एक लेन और जोड़ी जा सके। अगर ऐसा है तो किसान पथ से एक्सप्रेस लिंक एक्सप्रेसवे जुड़ सकता है और इससे लागत घट जाएगी और जल्द निर्माण भी हो जाएगा।

तैयार हुए दो विकल्प, पहले विकल्प की गई संस्तुति
असल में उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डवलपमेंट आथारिटी (यूपीडा) ने नए लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 61 किमी व नए 87 किमी के नए रूट का विकल्प तैयार किया था। दोनों विकल्पों के सकारात्मक व नकारत्मक पहलू भी दर्शाते हुए संस्तुति की थी कि 61 किमी का एक्सप्रेसवे बना कर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे से जोड़ा जा सकता है। इस विकल्प के तहत लिंक एक्सप्रेसवे लखनऊ, बाराबंकी, रायबरेली, उन्नाव व कानपुर जिले के दायरे में आएगा। इसके लिए 739.2 हेक्टेयर जमीन की जरूरत पड़ेगी। इस पर 1688 करोड़ रुपये की लागत आएगी जबकि दूसरा विकल्प 87 किमी का लिंक एक्सप्रेसवे का है। इस पर लागत 2410 करोड़ रुपये की लागत आएगी। यह लखनऊ, हरदोई, सीतापुर, बाराबंकी, बहराइच व गोंडा के दायरे में आएगा। अब औद्योगिक विकास विभाग ने तीनों विकल्पों पर रिपोर्ट बना कर सीएम को भेज दिया है।

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