मदरसों में अब गूंजेगा ‘वंदे मातरम’? BJP के दावे से बंगाल की राजनीति में मचा सियासी तूफान

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। Bharatiya Janata Party ने दावा किया है कि राज्य सरकार ने सभी मदरसों में ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य कर दिया है। बीजेपी के अनुसार, मदरसा शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी आदेश में सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान राष्ट्रीय गीत गाने का निर्देश दिया गया है।

दावे के मुताबिक, यह नियम राज्य के सभी मान्यता प्राप्त, सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त मदरसों पर लागू होगा। इस मुद्दे को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है और विपक्ष तथा बीजेपी के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।

‘राष्ट्रीय गीत को पूरा सम्मान दिया जाएगा’

इससे पहले भी राज्य सरकार की ओर से सभी स्कूलों में ‘वंदे मातरम’ के छहों अंतरे गाना अनिवार्य किए जाने की चर्चा रही थी। इस बीच Suvendu Adhikari ने कहा कि पश्चिम बंगाल में राष्ट्रीय गीत को पूरा सम्मान दिया जाएगा और सभी शिक्षण संस्थानों में इसका पालन जरूरी होगा।

हालांकि इस मुद्दे पर विपक्ष बीजेपी सरकार पर सवाल उठा रहा है, जबकि बीजेपी इसे राष्ट्रभक्ति से जोड़कर पेश कर रही है।

प्रदीप भंडारी ने विपक्ष पर साधा निशाना

बीजेपी प्रवक्ता Pradeep Bhandari ने गुरुवार 21 मई को X पर पोस्ट करते हुए विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “वंदे मातरम भारत की सभ्यता और देशभक्ति की धड़कन है।”

उन्होंने आगे लिखा कि “सुवेंदु दा के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य भर के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त मदरसों को तत्काल प्रभाव से सुबह की विधानसभा प्रार्थना के दौरान ‘वंदे मातरम’ का अनिवार्य गायन करने का आदेश दिया है।”

राहुल गांधी और अखिलेश यादव की चुप्पी पर उठाए सवाल

प्रदीप भंडारी ने इस मुद्दे पर विपक्षी नेताओं को भी घेरा। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee पर सांप्रदायिक तुष्टीकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि अब पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार राष्ट्रभक्ति के नाम पर काम कर रही है।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि “धर्मनिरपेक्ष ममता बनर्जी, राहुल गांधी और अखिलेश यादव चुप क्यों हैं? उनकी चुप्पी और विरोध उनके कट्टर तुष्टीकरण को उजागर करते हैं।”

राजनीतिक बयानबाजी के बीच बढ़ी बहस

मदरसों में ‘वंदे मातरम’ गाने को लेकर शुरू हुई यह बहस अब राजनीतिक रंग ले चुकी है। बीजेपी इसे राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय सम्मान का मुद्दा बता रही है, जबकि विपक्ष इस पर सरकार की मंशा को लेकर सवाल उठा रहा है।

फिलहाल इस दावे और आदेश को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

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