पटना। सासाराम से शुरू होकर पटना में समाप्त हुई वोटर अधिकार यात्रा पर अब सियासी बहस तेज हो गई है। विपक्षी दल जहां इसे सफल करार दे रहे हैं, वहीं सत्तापक्ष के नेताओं ने इसे पूरी तरह फ्लॉप और नौटंकी बताया है।
पप्पू यादव ने राहुल गांधी की तुलना महात्मा गांधी से की
पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि “राहुल गांधी महात्मा गांधी के रास्ते पर चल रहे हैं। यह उनकी तीसरी यात्रा है, जो देश की राजनीति को नई दिशा देने वाली है।”
उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी का मुख्य उद्देश्य लोकतंत्र और संविधान की रक्षा करना है। पप्पू यादव के अनुसार, आज देश की जनता में वोट चोरी को लेकर गुस्सा है और राहुल गांधी लोगों को न्याय दिलाने के लिए संघर्षरत हैं। उन्होंने दावा किया कि बिहार की जनता अब राहुल गांधी के विचारों के साथ खड़ी है।
एनडीए नेताओं ने बताया नौटंकी और फ्लॉप
बिहार के डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने इस यात्रा को “नौटंकी” बताया। उनका कहना था कि ये लोग लोकतंत्र के दुश्मन हैं और जनता इन्हें कभी स्वीकार नहीं करेगी।
वहीं बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि यह यात्रा पूरी तरह विफल रही। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “रोड शो में भीड़ जुटना और वोट में तब्दील होना, दोनों अलग-अलग बातें हैं।” उन्होंने कांग्रेस-आरजेडी गठबंधन को जनता से कटा हुआ करार दिया।
कांग्रेस नेताओं ने बताया बदलाव की शुरुआत
यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय चौधरी ने दावा किया कि “बिहार से उठी बदलाव की बयार अब पूरे देश में बहेगी।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किसी पर भी अभद्र टिप्पणी नहीं की है, यह केवल झूठा प्रचार है।
वहीं कांग्रेस के यूपी प्रभारी अविनाश पांडेय ने कहा कि पटना में हुए मार्च से देशभर में यह संदेश गया है कि सत्ता में बैठे लोग वोट चोरी कर लोकतंत्र की हत्या कर रहे हैं। उन्होंने चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाए और कहा कि आयोग को मताधिकार की रक्षा करनी चाहिए थी, लेकिन अब वह “रक्षक से भक्षक” बन गया है।
जहां विपक्षी नेताओं ने इस यात्रा को लोकतंत्र बचाने की दिशा में अहम कदम बताया, वहीं एनडीए नेताओं ने इसे जनता को गुमराह करने की कोशिश करार दिया। कुल मिलाकर, वोटर अधिकार यात्रा ने बिहार की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है और इसका असर आने वाले चुनावों पर देखने को मिल सकता है।