नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत पर लगातार दबाव बना रहे हैं, लेकिन भारत अपनी नीति और हितों से पीछे हटने को तैयार नहीं है। रूस से तेल खरीद और ट्रेड डील पर अमेरिका की शर्तें मानने से भारत के इनकार ने ट्रंप को हताश कर दिया है।
भारत ने नहीं झुकी ट्रंप की धमकियों के आगे
एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का एक ही कार में पहुंचना अमेरिका के लिए सीधा संदेश था कि भारत किसी दबाव में झुकने वाला नहीं है। ट्रंप प्रशासन बार-बार कह रहा है कि अगर भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर दे तो वह टैरिफ में ढील देने को तैयार है। लेकिन भारत ने साफ कहा है कि अपने नागरिकों और अर्थव्यवस्था के हितों के लिए वह रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा।
ट्रेड डील पर भी नहीं बनी बात
ट्रंप चाहते हैं कि भारत अमेरिकी कृषि और डेयरी क्षेत्र के लिए अपने दरवाजे खोले, लेकिन केंद्र सरकार ने किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हुए इसे सख्ती से खारिज कर दिया। यही कारण है कि भारत ने अभी तक ट्रेड डील को लेकर कोई पहल नहीं की।
ट्रंप ने जापान-दक्षिण कोरिया का दिया उदाहरण
भारत को राज़ी करने के लिए ट्रंप ने जापान और दक्षिण कोरिया का हवाला दिया और कहा कि भारत भी उनकी तरह अमेरिका पर भारी टैरिफ लगाता है। उन्होंने भारत पर “100 फीसदी टैरिफ” का आरोप लगाया। अमेरिका ने जापान और साउथ कोरिया पर 25% टैरिफ लगाया था, और इसी तरह भारत पर भी पहले 25% और बाद में रूसी तेल खरीद के चलते 25% अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया।
भारत का दो टूक जवाब
भारत ने अमेरिका के दबाव को नकारते हुए साफ कर दिया कि उसकी नीतियां देश की आवश्यकताओं के आधार पर तय होंगी, न कि किसी दूसरे देश की शर्तों पर। मोदी सरकार का कहना है कि ऊर्जा सुरक्षा और किसानों के हित किसी भी बाहरी दबाव से ज्यादा अहम हैं।
भारत और अमेरिका के बीच तनाव की असली वजह रूस से तेल आयात और ट्रेड डील को लेकर मतभेद है। ट्रंप लगातार चेतावनी और टैरिफ बढ़ाकर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन भारत का रुख साफ है—राष्ट्रीय हितों पर कोई समझौता नहीं होगा।