उत्तरकाशी आपदा में सेना बनी उम्मीद की किरण, 25 फीट ऊंचे मलबे को चीरते हुए कर रही रेस्क्यू ऑपरेशन

उत्तरकाशी, धराली। बादल फटने के बाद उत्तरकाशी के धराली गांव में मंजर दिल दहला देने वाला है—हर तरफ मलबा, तबाही और चीख-पुकार की गूंज। इस आपदा में सेना, आईटीबीपी और एनडीआरएफ की टीमें राहत और बचाव कार्य में दिन-रात जुटी हैं। जब हर ओर से रास्ते बंद हो गए और स्थानीय प्रशासन भी कई इलाकों तक नहीं पहुंच पाया, तब सेना के जवान उम्मीद बनकर आगे आए।

धराली गांव में करीब 25 फीट ऊंचे मलबे के नीचे फंसे ग्रामीणों को बचाने के लिए सेना और आईटीबीपी के जवान रास्ता बना रहे हैं। साथ ही, गांव तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए अस्थाई पुल बनाने का कार्य भी तेज़ी से चल रहा है, जिससे लगभग 200 फंसे हुए लोगों तक मदद पहुंचाई जा सके।

आपदा कंट्रोल रूम से लगातार हर पल की निगरानी की जा रही है। गंगोत्री हाईवे पर जगह-जगह भूस्खलन की वजह से रेस्क्यू में बाधाएं आ रही हैं, फिर भी राहत दलों ने मोर्चा नहीं छोड़ा। सेना की और टीमें, खोजी कुत्ते, ड्रोन और खुदाई करने वाली मशीनें हर्षिल भेजी गई हैं ताकि राहत कार्यों को और गति दी जा सके।

इस दौरान धराली में एक 32 वर्षीय युवक का शव मलबे से बरामद हुआ है। वहीं, एनडीआरएफ के डीआईजी मोहसिन शाहेदी ने जानकारी दी कि, “अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 50 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं।”

हर्षिल और सुखी टॉप इलाकों में अचानक बाढ़ आने की खबरें भी सामने आई हैं। हर्षिल में सेना के करीब 11 जवान लापता बताए जा रहे हैं, हालांकि सुखी टॉप में कोई हताहत नहीं हुआ है।

ऋषिकेश-उत्तरकाशी हाईवे पर भूस्खलन और जाम के कारण राहत टीमों को घटनास्थल पर पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, देहरादून में एयरलिफ्ट टीमें पूरी तरह से तैयार हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को तुरंत निकाला जा सके।

उत्तरकाशी की इस त्रासदी में जहां चारों ओर तबाही का मंजर है, वहीं सेना और राहत दल लोगों के लिए आशा की सबसे बड़ी किरण बनकर सामने आए हैं।

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