किसी भी शैक्षणिक कार्यक्रम के लिए शहर से बाहर रहने पर गोरखपुर विश्वविद्यालय के शिक्षक यदि शिक्षण कार्य से दूर रहते हैं, तो वे अनुपस्थित माने जाएंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने जारी आदेश में कहा है कि सेमिनार, वाइवा, कांफ्रेंस आदि के लिए शहर से बाहर रहने पर खुद को ऑन ड्यूटी बताने का कोई प्रावधान नहीं है।जिससे शिक्षकों की बेचैनी बढ़ गई है।दरअसल, विश्वविद्यालय के कुछ शिक्षक दूसरे शहर में सेमिनार, वाइवा, कांफ्रेंस या अन्य किसी शैक्षणिक कार्यक्रम के लिए कई दिनों तक शहर से बाहर बिना छुट्टी लिए रहते थे। इस दौरान वे खुद को ऑन ड्यूटी दिखा देते थे। जिससे उनका अवकाश कम नहीं होता था। ऐसा बार-बार होने की वजह से विश्वविद्यालय में कक्षाओं का संचालन, परीक्षा कार्य और अन्य गतिविधियां प्रभावित होती थीं। इसी को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने ऑन ड्यूटी के प्रावधान को खत्म कर दिया है। इतना ही नहीं शिक्षक यदि वाइवा, प्रैक्टिकल या खेल व सांस्कृतिक कार्यक्रमों में विश्वविद्यालय की टीम के साथ शहर के बाहर जाते हैं, उस दौरान भी उन्हें ड्यूटी लीव और स्टेशन लीव लेनी होगी।30 दिन की ड्यूटी लीव
शासन के निर्देशानुसार शिक्षक को पूरे सत्र में अधिकतम 30 दिवस का कार्यवकाश (ड्यूटी लीव) दिया जा सकता है, जिसमें शिक्षक विश्वविद्यालय की ओर से आवंटित सभी प्रकार के कार्य करेंगे। किसी कार्यक्रम के लिए यदि वे बाहर जा रहे हैं, तो भी ड्यूटी लीव में ही गिनी जाएगी। किसी भी दशा में शिक्षक के शिक्षा दिवसों को कम नहीं किया जाएगा। शिक्षकों को स्टेशन छोड़ने से पहले अब कुलसचिव से अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है।वाइवा और विवि के अन्य कार्यों में भी शिक्षकों को बदलकर कार्य लिया जाएगा। ताकि एक शिक्षक के अनुपस्थित रहने से शिक्षण कार्य प्रभावित न हो। बीते दिनों ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान कई शिक्षक बिना सूचना के शहर से थे। बैठकों से कई डीन और विभागाध्यक्ष भी गायब थे, जिसपर कुलपति ने नाराजगी व्यक्त की थी।क्या बोलीं कुलपति
डीडीयू की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि विश्वविद्यालय के शिक्षक बिना अनुमति के शैक्षिक कार्य से दूर नहीं हो सकते हैं। शासन के निर्देशों का कड़ाई से पालन करवाया जाएगा। किसी भी दशा में छात्रों की पढ़ाई बाधित नहीं होगी।छुट्टी में गिनी जाएगी ड्यूटी, यूपी की इस यूनिवसिटी में एक आदेश से शिक्षकों में बढ़ी बेचैनी
किसी भी शैक्षणिक कार्यक्रम के लिए शहर से बाहर रहने पर गोरखपुर विश्वविद्यालय के शिक्षक यदि शिक्षण कार्य से दूर रहते हैं, तो वे अनुपस्थित माने जाएंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने जारी आदेश में कहा है कि सेमिनार, वाइवा, कांफ्रेंस आदि के लिए शहर से बाहर रहने पर खुद को ऑन ड्यूटी बताने का कोई प्रावधान नहीं है।जिससे शिक्षकों की बेचैनी बढ़ गई है।दरअसल, विश्वविद्यालय के कुछ शिक्षक दूसरे शहर में सेमिनार, वाइवा, कांफ्रेंस या अन्य किसी शैक्षणिक कार्यक्रम के लिए कई दिनों तक शहर से बाहर बिना छुट्टी लिए रहते थे। इस दौरान वे खुद को ऑन ड्यूटी दिखा देते थे। जिससे उनका अवकाश कम नहीं होता था। ऐसा बार-बार होने की वजह से विश्वविद्यालय में कक्षाओं का संचालन, परीक्षा कार्य और अन्य गतिविधियां प्रभावित होती थीं। इसी को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने ऑन ड्यूटी के प्रावधान को खत्म कर दिया है। इतना ही नहीं शिक्षक यदि वाइवा, प्रैक्टिकल या खेल व सांस्कृतिक कार्यक्रमों में विश्वविद्यालय की टीम के साथ शहर के बाहर जाते हैं, उस दौरान भी उन्हें ड्यूटी लीव और स्टेशन लीव लेनी होगी।30 दिन की ड्यूटी लीव
शासन के निर्देशानुसार शिक्षक को पूरे सत्र में अधिकतम 30 दिवस का कार्यवकाश (ड्यूटी लीव) दिया जा सकता है, जिसमें शिक्षक विश्वविद्यालय की ओर से आवंटित सभी प्रकार के कार्य करेंगे। किसी कार्यक्रम के लिए यदि वे बाहर जा रहे हैं, तो भी ड्यूटी लीव में ही गिनी जाएगी। किसी भी दशा में शिक्षक के शिक्षा दिवसों को कम नहीं किया जाएगा। शिक्षकों को स्टेशन छोड़ने से पहले अब कुलसचिव से अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है।वाइवा और विवि के अन्य कार्यों में भी शिक्षकों को बदलकर कार्य लिया जाएगा। ताकि एक शिक्षक के अनुपस्थित रहने से शिक्षण कार्य प्रभावित न हो। बीते दिनों ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान कई शिक्षक बिना सूचना के शहर से थे। बैठकों से कई डीन और विभागाध्यक्ष भी गायब थे, जिसपर कुलपति ने नाराजगी व्यक्त की थी।क्या बोलीं कुलपति
डीडीयू की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि विश्वविद्यालय के शिक्षक बिना अनुमति के शैक्षिक कार्य से दूर नहीं हो सकते हैं। शासन के निर्देशों का कड़ाई से पालन करवाया जाएगा। किसी भी दशा में छात्रों की पढ़ाई बाधित नहीं होगी।