नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है। चीन की मदद से पाकिस्तान ने बलूचिस्तान से जुड़े दो संगठनों – बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) और उसकी मिलिट्री विंग मजीद ब्रिगेड – को वैश्विक आतंकी संगठन घोषित कराने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने इस प्रस्ताव पर वीटो लगाकर इसे रोक दिया।
क्यों खारिज हुआ पाकिस्तान का प्रस्ताव?
अमेरिका ने कहा कि जिन प्रावधानों के तहत पाकिस्तान ने बीएलए और मजीद ब्रिगेड को आतंकी घोषित करने की अपील की थी, वे लागू नहीं होते।
दरअसल, यूएन में पाकिस्तान ने सेक्शन 1267 के तहत यह मांग रखी थी, जो अल-कायदा और आईएसआईएस से जुड़े संगठनों पर लागू होता है। लेकिन अमेरिका का कहना है कि इन दोनों बलोच संगठनों का इन वैश्विक आतंकी नेटवर्क से कोई संबंध साबित नहीं हुआ।
अमेरिका पहले ही कर चुका है आतंकी घोषित
गौरतलब है कि अमेरिका ने बीएलए और मजीद ब्रिगेड को पहले ही विदेशी आतंकी संगठन (FTO) घोषित कर दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने हाल में कहा था कि मजीद ब्रिगेड, बीएलए के पिछले नामित आतंकी पदनाम (SDGT) का ही उपनाम है।
चीन-पाकिस्तान की कोशिश नाकाम
पाकिस्तान ने चीन के समर्थन से बीएलए और मजीद ब्रिगेड पर बैन लगाने की कोशिश की थी। चीन स्वयं संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है और पाकिस्तान फिलहाल अस्थायी सदस्य के तौर पर शामिल है। लेकिन अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस की तिकड़ी ने प्रस्ताव को रोक दिया, जिससे चीन-पाकिस्तान का यह प्रयास असफल हो गया।
भारत के मामलों में चीन का विरोध
भारत जब भी जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर या लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी नेताओं को वैश्विक आतंकी घोषित कराने का प्रस्ताव लाता है, चीन वीटो कर देता है। साजिद मीर, शाहिद महमूद और तल्हा सईद जैसे आतंकी भी चीनी वीटो के कारण यूएन में प्रतिबंधित नहीं हो सके।
बीएलए का दावा – “हम आतंकी नहीं, रक्षक”
वीटो के बाद बीएलए ने बयान जारी कर कहा कि उसके लड़ाके आतंकी नहीं बल्कि बलूच मातृभूमि के रक्षक हैं। संगठन का दावा है कि उनकी लड़ाई पाकिस्तानी सेना की दमनकारी नीतियों के खिलाफ है, न कि विश्व शांति के खिलाफ।
मई 2025 में बीएलए ने जाफर एक्सप्रेस ट्रेन हाईजैक कर सुर्खियां बटोरी थीं। इसके अलावा संगठन अक्सर बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना पर हमले करता रहा है।
पाकिस्तान को उम्मीद थी कि चीन के समर्थन से बीएलए पर बैन लग जाएगा, लेकिन अमेरिका-फ्रांस-ब्रिटेन की तिकड़ी ने उसके मंसूबों पर पानी फेर दिया।