ईरान पर अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए भीषण हवाई हमलों ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। शनिवार, 28 फरवरी को हुए इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है। इसके साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह चौंकाने वाला दावा किया है कि ईरान की सत्ता संभालने वाली दूसरी और तीसरी पंक्ति की लीडरशिप भी इस घातक स्ट्राइक में खत्म हो चुकी है। इस अभूतपूर्व घटनाक्रम के बाद अब पूरी दुनिया में सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है कि ईरान की कमान आखिर किसके हाथों में जाएगी।
ट्रंप का सनसनीखेज बयान
रविवार, 1 मार्च को अमेरिकी न्यूज चैनल एबीसी के साथ एक साक्षात्कार के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले के परिणामों पर विस्तार से बात की। अपने बयान में ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा, ‘अमेरिका-इजरायल का ईरान पर किए गए हमले की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सत्ता संभालने वाले ज्यादातर उम्मीदवार मारे जा चुके हैं, दूसरे और तीसरे लेवल की लीडरशिप वाले भी खत्म हो चुके हैं।’ शीर्ष उम्मीदवारों के खात्मे के बाद यह पूरी तरह से अनिश्चित हो गया है कि ईरान का अगला सर्वोच्च नेता कौन होगा।
ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ और परिवार का नुकसान
अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने इस बड़ी सैन्य कार्रवाई को ‘एपिक फ्यूरी’ (Epic Fury) का नाम दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई के परिवार के चार सदस्यों के भी मारे जाने की खबर है, जिनमें उनकी एक बेटी और एक पोता भी शामिल हैं। हालांकि, इस पूरे ऑपरेशन में अमेरिकी सेना को भी नुकसान उठाना पड़ा है। पेंटागन के मुताबिक, इस कार्रवाई के दौरान उनके तीन सैनिकों की मौत हुई है और पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
अब किसके हाथों में होगी ईरान की सत्ता?
शीर्ष नेतृत्व के पूर्ण सफाए के बाद ईरान फिलहाल एक बड़े राजनीतिक शून्य से गुजर रहा है। ईरानी संविधान के प्रावधानों के तहत, फिलहाल सर्वोच्च नेता की शक्तियां एक अस्थायी परिषद को सौंपी गई हैं। इस अंतरिम परिषद में राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, न्यायपालिका के प्रमुख और संरक्षक परिषद के वरिष्ठ धर्मगुरु अयातुल्ला अलीरेजा अराफी शामिल हैं। फिलहाल अराफी को ही अंतरिम नेता के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि उन्होंने अब तक देश के सामने कोई भी सार्वजनिक भाषण नहीं दिया है।
ईरान का संविधान ऐसे किसी भी राजनीतिक समूह पर सख्त प्रतिबंध लगाता है जो इस्लामी गणराज्य या सर्वोच्च नेता की संस्था के खिलाफ हो, इसलिए वहां कोई औपचारिक विपक्ष मौजूद नहीं है जो सत्ता का विकल्प बन सके। इस बीच, ईरान में चल रहे प्रदर्शनों में रजा पहलवी का नाम प्रमुख चेहरे के रूप में उभरा है, लेकिन अभी तक उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की तरफ से कोई खुला या सार्वजनिक समर्थन प्राप्त नहीं हुआ है।