लखनऊ: उत्तर प्रदेश में चल रहे वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान ‘फॉर्म-7’ (Form-7) का जिन्न बाहर आ गया है. समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि एक साजिश के तहत उनके वोटरों के नाम काटे जा रहे हैं. इस बीच, चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों ने सियासी हलचल और बढ़ा दी है, क्योंकि जनवरी के आखिरी दिनों में नाम काटने वाले आवेदनों की बाढ़ सी आ गई है.
अखिलेश का आरोप: ‘फर्जी दस्तखत से काटे जा रहे PDA के नाम’
कन्नौज सांसद अखिलेश यादव ने 1 और 2 फरवरी को लगातार बयान जारी कर गंभीर आरोप लगाए हैं:
- टारगेट पर PDA: उनका दावा है कि पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) वोटरों के नाम हटाने के लिए ‘फॉर्म-7’ का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है.
- फर्जीवाड़ा: अखिलेश के मुताबिक, नकली दस्तखत के साथ थोक के भाव में आवेदन जमा किए जा रहे हैं.
- कार्रवाई की मांग: उन्होंने ऐसे लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने और मामले का न्यायिक संज्ञान लेने की मांग की है. उन्होंने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को अलर्ट रहने और संदिग्ध मामलों में लीगल एक्शन लेने को कहा है.
आंकड़ों ने क्यों बढ़ाई टेंशन? (जनवरी का लेखा-जोखा)
SIR अभियान के तहत 6 जनवरी से 31 जनवरी 2026 के बीच जमा हुए फॉर्म-7 के आंकड़े चौंकाने वाले हैं. महीने की शुरुआत धीमी रही, लेकिन अंत होते-होते ‘वोटर डिलीशन’ की सुनामी आ गई.
- कुल आवेदन: 31 जनवरी तक कुल 57,173 फॉर्म-7 जमा हुए.
- शुरुआत: 6-8 जनवरी तक एक भी फॉर्म नहीं आया था. 11 जनवरी को अचानक 2,236 आवेदन आए.
- महीने का अंत: 19 जनवरी से रोज 2500 से ज्यादा फॉर्म आने लगे.
- रिकॉर्ड तोड़ आखिरी दिन: सबसे ज्यादा हैरानी 31 जनवरी के आंकड़े ने पैदा की, जब एक ही दिन में 8,503 लोगों के नाम हटाने के लिए आवेदन आए. 30 जनवरी को भी यह संख्या 4,288 थी.
क्या है फॉर्म-7? (Form-7)
फॉर्म-7 चुनाव आयोग द्वारा जारी किया गया वह दस्तावेज है, जिसका इस्तेमाल वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए किया जाता है. यह तब भरा जाता है जब:
- मतदाता की मौत हो गई हो.
- मतदाता दूसरी जगह शिफ्ट हो गया हो.
- नाम दो बार (Duplicate) दर्ज हो.
- या किसी वजह से वह वोटिंग के लिए अयोग्य हो.अखिलेश यादव का डर है कि इसी फॉर्म का सहारा लेकर जीवित और वैध मतदाताओं के नाम भी लिस्ट से गायब किए जा सकते हैं.