रामपुर स्थित जौहर यूनिवर्सिटी पर संभावित प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति तेज हो गई है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के बाद अब यह मुद्दा यूपी की सियासत का नया केंद्र बनता दिख रहा है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दल इसे शिक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मामला बता रहे हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि प्रशासन केवल कानून के अनुसार कार्रवाई कर रहा है। इस बीच छात्रों का विरोध-प्रदर्शन भी जारी है, जिससे राजनीतिक हलकों में इसे संभावित Gen-Z Movement 2.0 के रूप में देखा जा रहा है।
रामपुर पहुंचे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय जौहर यूनिवर्सिटी के मुद्दे पर रामपुर पहुंचे। उन्होंने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर यूनिवर्सिटी के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई रोकने की मांग करने की बात कही। अपने दौरे के दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के परिवार से मुलाकात का भी कार्यक्रम तय किया।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने भी किया प्रदर्शन
पूर्व मंत्री और अपनी जनता पार्टी के प्रमुख स्वामी प्रसाद मौर्य ने भी इस मुद्दे पर लखनऊ के विधायक निवास रोड पर अपने समर्थकों के साथ प्रदर्शन किया। उन्होंने सरकार पर राजनीतिक दुर्भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया और जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने की मांग उठाई।
सपा पहले से ही मैदान में, रामपुर भेज चुकी प्रतिनिधिमंडल
समाजवादी पार्टी इस मुद्दे पर पहले से सक्रिय है। पार्टी अपने विधायकों और सांसदों का प्रतिनिधिमंडल पहले ही रामपुर भेज चुकी है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार पर निशाना साध रहे हैं।
सपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे जौहर यूनिवर्सिटी के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई का विरोध करेंगे और इसे बचाने के लिए आंदोलन जारी रखेंगे।
बीजेपी ने कहा- कानून के तहत हो रही कार्रवाई
भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रशासन पूरी तरह कानून के दायरे में रहकर काम कर रहा है। पार्टी के अनुसार यदि किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों का उल्लंघन सामने आया है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होना स्वाभाविक है और इसे राजनीतिक मुद्दा बनाना उचित नहीं है।
छात्रों का प्रदर्शन जारी, बड़े आंदोलन की अटकलें
रामपुर में जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर छात्रों का विरोध-प्रदर्शन लगातार जारी है। विपक्ष भी इस मुद्दे को व्यापक जनआंदोलन का रूप देने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि क्या यह मामला दिल्ली के जंतर-मंतर की तर्ज पर एक बड़े छात्र आंदोलन का रूप ले सकता है।