होर्मुज पर ट्रंप की नाकेबंदी का ऐलान, इजरायल की सीजफायर तोड़ने की धमकी-अब रूस-चीन की बड़ी चाल से दुनिया में हलचल

इस्लामाबाद वार्ता फेल होने के बाद Donald Trump ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट में आने-जाने वाले जहाजों की नाकेबंदी शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नौसेना को निर्देश दिए गए हैं कि जो जहाज ईरान को शुल्क देकर इस मार्ग से गुजरने की कोशिश करेंगे, उन्हें रोका जाएगा। इस कदम के बाद वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।

रूस-चीन की कूटनीतिक सक्रियता तेज

इस बढ़ते तनाव के बीच Sergey Lavrov 14 अप्रैल 2026 को चीन दौरे पर जा रहे हैं। यह यात्रा Wang Yi के निमंत्रण पर हो रही है। माना जा रहा है कि इस दौरान होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति और अमेरिका की नाकेबंदी पर विस्तार से चर्चा होगी।

चीन पहले से ही ईरान से बड़े पैमाने पर तेल आयात करता रहा है और अमेरिकी प्रतिबंधों को कई बार नजरअंदाज करता आया है, ऐसे में यह मुद्दा बीजिंग के लिए बेहद अहम बन गया है।

चीन ने जताई चिंता और उम्मीद

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि लावरोव की यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों, सहयोग और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बातचीत होगी।

चीन ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान बातचीत तनाव कम करने की दिशा में एक कदम था. चीन को उम्मीद है कि सीजफायर जारी रहेगा, युद्ध की आग को फिर से भड़काने के बजाय झगड़ों को राजनीतिक और कूटनीतिक तरीकों से सुलझाया जाएगा और गल्फ में शांति की जल्द वापसी के लिए हालात बनाए जाएंगे.”

ईरान की चेतावनी से बढ़ा खतरा

ईरान ने वार्ता विफल होने के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है और नाकेबंदी के ऐलान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरान ने साफ कहा है कि अगर उसके बंदरगाहों को खतरा हुआ, तो फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा।

वैश्विक तेल बाजार पर असर की आशंका

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की सप्लाई होती है। ऐसे में अमेरिका की नाकेबंदी की चेतावनी और बढ़ते तनाव से वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और तेल संकट की आशंका गहरा गई है।

बढ़ती तनातनी से दुनिया चिंतित

एक तरफ अमेरिका का सख्त रुख, दूसरी ओर ईरान की चेतावनी और अब रूस-चीन की कूटनीतिक सक्रियता—इन सबने मिलकर अंतरराष्ट्रीय हालात को बेहद संवेदनशील बना दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दुनिया की नजरें टिकी रहेंगी।

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