कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 291 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है और इस बार पार्टी ने नंदीग्राम सीट पर बड़ा रणनीतिक दांव खेलते हुए बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ उनके ही करीबी रहे पबित्र कर को मैदान में उतार दिया है। इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
शुभेंदु अधिकारी के सामने ‘शागिर्द’ की चुनौती
नंदीग्राम सीट पर मुकाबला एक बार फिर हाई-प्रोफाइल बनता नजर आ रहा है। पबित्र कर ने पिछले विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी के लिए जमीनी स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाई थी, जिसके परिणामस्वरूप मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा था।
मंगलवार (17 मार्च 2026) को पबित्र कर ने तृणमूल कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। पार्टी की ओर से कहा गया कि उन्होंने बीजेपी की जनविरोधी नीतियों से नाराज होकर यह फैसला लिया है। दिलचस्प बात यह है कि पबित्र कर पहले भी टीएमसी का हिस्सा रह चुके हैं।
2021 की जीत में निभाई थी अहम भूमिका
साल 2018 में पबित्र कर बोयाल क्षेत्र के दो गांवों के प्रधान थे और इलाके में मजबूत पकड़ रखते थे। 2021 विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने शुभेंदु अधिकारी के साथ बीजेपी जॉइन की थी और क्षेत्र में पार्टी को बढ़त दिलाने में उनकी अहम भूमिका मानी गई थी।
2021 के चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट से ममता बनर्जी को करीब 1,900 वोटों के अंतर से हराया था। इसके बाद 2023 में पबित्र कर की पत्नी ने बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीतकर बोयाल क्षेत्र की दो ग्राम पंचायतों की प्रमुख का पद संभाला।
नंदीग्राम में मजबूत स्थानीय समीकरण
नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र दो ब्लॉकों में विभाजित है, जिनमें नंदीग्राम-2 ब्लॉक में बीजेपी की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत मानी जाती है। पबित्र कर इसी इलाके के निवासी हैं और स्थानीय स्तर पर उनका प्रभाव भी काफी मजबूत बताया जाता है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, टीएमसी द्वारा उन्हें उम्मीदवार बनाना स्थानीय समीकरणों को साधने की रणनीति माना जा रहा है। ऐसे में नंदीग्राम सीट पर एक बार फिर बीजेपी और टीएमसी के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है।