हमने दर्जनों पाकिस्तानी आतंकी मारे, तालिबान ने पहली बार कबूला

 

अफगानिस्तान तालिबान ने हाल के हमलों में ‘दर्जनों पाकिस्तानियों’ के शामिल होने का आरोप लगाया है। यही नहीं, तालिबान ने पहली बार खुलेआम कबूल किया है कि उसने दर्जनों पाकिस्तानी आतंकवादियों को मौत से घाट उतारा है।काबुल के तालिबान अधिकारियों ने बुधवार को आरोप लगाया कि पिछले साल पाकिस्तान के दर्जनों इस्लामिक स्टेट समूह के आतंकवादी अफगानिस्तान में मारे गए या पकड़े गए हैं। तालिबान की प्रतिक्रिया पाकिस्तानी आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर द्वारा पाकिस्तान के भीतर आतंकवादी घटनाओं में “अफगान नागरिकों की संलिप्तता” बताए जाने के बाद आई है। असीम मुनीर ने कहा था कि पाकिस्तान में हो रहे आतंकी हमलों के पीछे “अफगान नागरिक” शामिल हैं। साथ ही उन्होंने कहा था कि इससे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

पाक आर्मी चीफ की टिप्पणी से पहले पाकिस्तानी विदेश कार्यालय ने भी एक बयान जारी कर पिछले महीने झोब छावनी पर हुए हालिया हमले में अफगान आतंकवादियों की भूमिका की पुष्टि की थी। पाकिस्तान में आत्मघाती हमलों में बढ़ोतरी को लेकर हाल ही में पड़ोसियों के बीच तनाव बढ़ गया है। इस्लामाबाद का दावा है कि आतंकवादियों को अक्सर अफगानों द्वारा मदद मिलती है।पाकिस्तानी सेना प्रमुख के बयानों से भड़के तालिबान ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। पाक सेना प्रमुख और विदेश मंत्रालय की टिप्पणियों के बाद, अफगान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने बुधवार को दावा किया कि पिछले साल, “अफगानिस्तान में हमारी सेना द्वारा मारे गए 18 लोग पाकिस्तानी नागरिक थे।” उन्होंने कहा, ”वे दाएश (आईएस के सदस्य) थे और वे विभिन्न बम विस्फोटों और हमलों में शामिल थे।” उन्होंने कहा कि दर्जनों अन्य लोग अफगान जेलों में बंद हैं।

इससे पहले मंगलवार देर रात जारी एक बयान में कहा गया था कि तालिबान अधिकारियों को “क्षेत्र में किसी भी देश की सुरक्षा विफलता” के लिए दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए। तालिबान ने पाकिस्तान को खूब खरीखोटी सुनाई। इसने कहा, “पाकिस्तान को दोष देने के बजाय, अफगानिस्तान सरकार ने अपने सुरक्षा उपाय मजबूत किए हैं।” बता दें कि यह पहली बार है जब तालिबान अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से अफगानिस्तान में हमलों के लिए पाकिस्तानी नागरिकों पर आरोप लगाया है।इस्लामाबाद का कहना है कि पाकिस्तान में हमले करने वाले आतंकवादी अफगानिस्तान में पनाहगाहों से काम कर रहे हैं और अफगान नागरिकों द्वारा उन्हें सहायता प्राप्त की जा रही है। पिछले हफ्ते, अफगान राज्य मीडिया ने रक्षा मंत्री का एक भाषण प्रसारित किया जिसमें तालिबान लड़ाकों को चेतावनी दी गई कि अफगानिस्तान के बाहर लड़ना धार्मिक रूप से स्वीकृत “जिहाद” नहीं है, बल्कि युद्ध है और सर्वोच्च नेता हिबतुल्ला अखुंदजादा ने इससे मना किया है।

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