इंसानों से ज्यादा कुत्तों की चिंता? सुप्रीम कोर्ट हैरान; बोले- इतनी याचिकाएं तो आदमी के लिए नहीं आतीं

नई दिल्ली: आवारा कुत्तों (Stray Dogs) की समस्या देश में कितनी गंभीर बहस का मुद्दा बन चुकी है, इसका अंदाजा सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी से लगाया जा सकता है। मंगलवार (6 जनवरी, 2026) को कोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा कि आवारा कुत्तों के मामले में इतनी अर्जी (Petitions) आ रही हैं, जितनी आमतौर पर इंसानों से जुड़े मामलों में भी नहीं आतीं।

जस्टिस बोले- कल सबको सुनेंगे

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच के सामने जब वकीलों ने अंतरिम याचिका का जिक्र किया, तो जस्टिस मेहता ने यह टिप्पणी की।

  • बड़ी सुनवाई: कोर्ट ने कहा कि बुधवार को तीन जजों की बेंच (जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया) इस मामले पर विस्तृत सुनवाई करेगी और सभी वकीलों का पक्ष सुनेगी।

कोर्ट पहले ही दे चुका है ये सख्त निर्देश

नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने पब्लिक प्लेस पर कुत्तों के काटने की घटनाओं पर चिंता जताते हुए कड़े निर्देश दिए थे:

  1. नो एंट्री जोन: शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए।
  2. वापसी नहीं: पकड़े गए कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण के बाद उन्हें शेल्टर होम (आश्रय स्थलों) में भेजा जाए। कोर्ट ने साफ कहा था कि उन्हें वापस उसी जगह न छोड़ा जाए जहां से पकड़ा गया था।
  3. हाईवे से मवेशी हटाएं: कोर्ट ने राज्य और नेशनल हाईवे से सभी आवारा पशुओं को हटाने का भी आदेश दिया था।

क्यों हो रही है सुनवाई?

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल दिल्ली-NCR में बच्चों को कुत्ते काटने और रेबीज फैलने की खबरों पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया था। कोर्ट का मानना है कि स्कूल-कॉलेजों में डॉग बाइट की घटनाएं प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती हैं।

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