J&K Statehood Resolution: अमित शाह से मिले सुनील शर्मा, विधानसभा में प्रस्ताव को लेकर बढ़ा सियासी तनाव

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर चल रही राजनीतिक हलचल के बीच विधानसभा में विपक्ष के नेता (LoP) सुनील शर्मा ने शनिवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनके आवास पर मुलाकात की। यह बैठक मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग वाला प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद हुई। प्रस्ताव में 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव का संदर्भ भी शामिल है।

अमित शाह से मुलाकात में जम्मू-कश्मीर के किन मुद्दों पर हुई चर्चा?

सूत्रों के मुताबिक, सुनील शर्मा ने बैठक के दौरान जम्मू-कश्मीर से जुड़े कई अहम विषयों पर चर्चा की। इनमें सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, विकास और विधानसभा के मौजूदा सत्र से जुड़े मुद्दे शामिल रहे। विधानसभा में राज्य का पूर्ण दर्जा बहाल करने की मांग वाले प्रस्ताव पर आगे चर्चा होनी है, ऐसे में सदन के भीतर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

शर्मा ने गृह मंत्री को विधानसभा सत्र के दौरान बने तनावपूर्ण माहौल की जानकारी भी दी। हाल के दिनों में विपक्ष के विरोध-प्रदर्शन और प्रस्तावों को लेकर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली है। बीजेपी विधायकों ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा पेश राज्य के दर्जे वाले प्रस्ताव में 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव के संदर्भ का विरोध किया है।

SPOs की सैलरी का मुद्दा भी उठाया

बैठक में सुनील शर्मा ने स्पेशल पुलिस ऑफिसर्स यानी SPOs की सैलरी बढ़ाने से जुड़ी लंबित प्रशासनिक फाइल का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने इस मामले में अंतिम चरण की प्रक्रिया को तेज करने के लिए केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की।

मुलाकात के बाद शर्मा ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर में शांति, विकास और समृद्धि के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों नेताओं के बीच क्षेत्र की महत्वपूर्ण घटनाओं और विधानसभा की चल रही कार्यवाही पर भी चर्चा हुई।

राज्य के दर्जे के प्रस्ताव पर बीजेपी का क्या रुख है?

उमर अब्दुल्ला सरकार की ओर से पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव लाए जाने के बाद बीजेपी ने इसके मौजूदा स्वरूप पर आपत्ति जताई है। सुनील शर्मा ने कहा है कि बीजेपी जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे की बहाली पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन अनुच्छेद 370 और 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव को चर्चा में शामिल करने का विरोध करेगी।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा पेश प्रस्ताव में 26 जून 2000 और 6 नवंबर 2024 को विधानसभा में पारित प्रस्तावों का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग की गई है। प्रस्ताव पेश होने के दौरान विधानसभा में बीजेपी विधायकों के विरोध के कारण हंगामे की स्थिति भी बनी।

बीजेपी का कहना है कि अनुच्छेद 370 और स्वायत्तता से जुड़े पुराने मुद्दों को राज्य के दर्जे की मांग के साथ जोड़कर चर्चा नहीं की जानी चाहिए। वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस की ओर से बीजेपी के रुख पर सवाल उठाए गए हैं और पार्टी से जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे को लेकर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की गई है।

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