चीनी के Stock पर सरकार का बड़ा Action! बड़े खरीदार 15 दिन से ज्यादा नहीं रख सकेंगे शक्कर

चीनी की कीमतों में तेजी के बीच केंद्र सरकार ने इसके भंडारण को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने बड़े उपभोक्ताओं के लिए चीनी का Stock Limit तय करते हुए नोटिफिकेशन जारी किया है। नए निर्देश के तहत ऐसे बड़े खरीदार, जो हर महीने कम से कम 10 मीट्रिक टन चीनी का इस्तेमाल करते हैं, अब 15 दिनों से अधिक की खपत के बराबर चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेंगे।

सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब बाजार में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर हलचल तेज है। नए आदेश का मकसद बड़े उपभोक्ताओं द्वारा जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने की स्थिति पर निगरानी रखना और बाजार में इसकी उपलब्धता बनाए रखना है।

किन बड़े उपभोक्ताओं पर लागू होगा नया नियम?

सरकार के नोटिफिकेशन के मुताबिक, बड़े उपभोक्ता से आशय ऐसे संस्थागत खरीदारों से है जो मौजूदा महीने को छोड़कर पिछले एक साल के दौरान औसतन हर महीने कम से कम 10 मीट्रिक टन चीनी की खपत करते रहे हैं।

इस श्रेणी में मिठाई विक्रेता, शीतल पेय बनाने वाली कंपनियां, Food Processing Industry और अन्य Institutional Buyers शामिल होंगे। ऐसे उपभोक्ता उत्पादन, खपत या किसी अन्य उपयोग के लिए कच्चे माल के रूप में चीनी का इस्तेमाल करते हैं।

नियम के तहत कोई भी पात्र बड़ा उपभोक्ता अपनी औसत जरूरत के हिसाब से 15 दिनों से अधिक की अवधि के लिए चीनी का Stock नहीं रख सकेगा।

सरकार और स्थानीय संस्थाओं को मिलेगी छूट

नोटिफिकेशन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्टॉक सीमा से जुड़े ये प्रावधान केंद्र सरकार, राज्य सरकार, संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन और स्थानीय निकायों पर लागू नहीं होंगे।

यानी सरकारी संस्थाओं और स्थानीय प्रशासनिक निकायों को इस Stock Limit के दायरे से बाहर रखा गया है।

चीनी मिलों की बिक्री पर भी सरकार की नजर

सरकार ने केवल बड़े उपभोक्ताओं के स्टॉक पर ही निगरानी नहीं बढ़ाई है, बल्कि चीनी मिलों से बिक्री का विस्तृत रिकॉर्ड भी मांगा है। चीनी मिलों को 17, 18 और 19 अगस्त को हुई बिक्री का पूरा ब्योरा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

मिलों को प्रत्येक बिक्री के संबंध में यह बताना होगा कि कितनी चीनी बेची गई, किस कीमत पर बिक्री हुई और लेनदेन किस तारीख को किया गया।

अगर एक ही दिन अलग-अलग खरीदारों को अलग-अलग कीमत पर चीनी बेची गई है तो प्रत्येक सौदे का अलग रिकॉर्ड देना होगा।

खरीदार का नाम, पता और GST नंबर भी देना होगा

सरकार के निर्देश के अनुसार हर लेनदेन में खरीदार का पूरा नाम, पता, फोन या मोबाइल नंबर और GST Number उपलब्ध कराना होगा।

इसके अलावा बिक्री की मात्रा क्विंटल में और कीमत रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से दर्ज करनी होगी। इससे सरकार को चीनी की बिक्री के वास्तविक दाम, मात्रा और खरीदारों की जानकारी एक साथ मिल सकेगी।

GST Return से तय होगी चीनी की खपत

बड़े उपभोक्ताओं की चीनी खपत का निर्धारण भी एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। इसके लिए विक्रेताओं और खरीदारों की ओर से दाखिल किए गए GST Returns में चीनी से संबंधित HSN Code का इस्तेमाल किया जाएगा।

हर चीनी मिल को बड़े उपभोक्ताओं को बेची गई चीनी की मासिक मात्रा का सत्यापन करना होगा। यह बिक्री सीधे ग्राहक को की गई हो या Dealer के माध्यम से, दोनों स्थितियों में उसका रिकॉर्ड रखा जाएगा।

इस व्यवस्था के जरिए सरकार यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि कौन-सा खरीदार वास्तव में बड़े उपभोक्ता की श्रेणी में आता है और उसकी औसत मासिक खपत कितनी है।

कीमतों में उछाल के बीच सरकार का कदम

चीनी की कीमतों में हालिया तेजी के बीच सरकार के इस फैसले को बाजार में उपलब्धता और Stock Monitoring से जोड़कर देखा जा रहा है। बड़े उपभोक्ताओं के पास जरूरत से ज्यादा स्टॉक जमा होने की स्थिति को रोकने के लिए 15 दिनों की सीमा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

साथ ही चीनी मिलों से बिक्री के सौदों की विस्तृत जानकारी मांगने से सरकार को बाजार में चीनी की कीमत और सप्लाई पर अधिक निगरानी रखने में मदद मिलेगी।

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