बड़ी खबर: जेल से रिहा होंगे सोनम वांगचुक, लद्दाख हिंसा मामले में मोदी सरकार ने लिया अहम फैसला

लद्दाख हिंसा मामले में गिरफ्तार किए गए सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर Sonam Wangchuk को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मोदी सरकार ने उनकी हिरासत समाप्त करते हुए उन्हें तत्काल रिहा करने का निर्णय लिया है। सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम यानी National Security Act के तहत की गई उनकी हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है।

सरकार का कहना है कि यह कदम लद्दाख में शांति और स्थिरता का माहौल मजबूत करने और सभी पक्षों के साथ रचनात्मक संवाद को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

लद्दाख हिंसा के बाद हुई थी गिरफ्तारी

सरकारी जानकारी के मुताबिक, 24 सितंबर 2025 को लेह में हिंसा की घटना के बाद क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति गंभीर हो गई थी। इसके बाद लेह के जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी आदेश के तहत 26 सितंबर 2025 को सोनम वांगचुक को NSA के प्रावधानों के तहत हिरासत में लिया गया था।

अब तक वह अपनी हिरासत की अवधि का लगभग आधा समय जेल में बिता चुके हैं। केंद्र सरकार का कहना है कि मौजूदा हालात को देखते हुए और विस्तृत विचार-विमर्श के बाद उनकी हिरासत समाप्त करने का फैसला लिया गया है।

संवाद के जरिए समाधान की कोशिश

केंद्र सरकार फिलहाल लद्दाख में विभिन्न सामाजिक संगठनों, हितधारकों और स्थानीय नेताओं के साथ लगातार बातचीत कर रही है ताकि क्षेत्र की समस्याओं और लोगों की चिंताओं का समाधान निकाला जा सके।

सरकार के अनुसार लंबे समय से जारी बंद और विरोध प्रदर्शनों का असर समाज के कई वर्गों पर पड़ा है। छात्रों, नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं, व्यापारियों, पर्यटन से जुड़े लोगों और पर्यटकों सहित कई क्षेत्रों को नुकसान उठाना पड़ा है, जिससे लद्दाख की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हुई है।

कौन हैं सोनम वांगचुक

Sonam Wangchuk लद्दाख के जाने-माने इंजीनियर, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वे लंबे समय से शिक्षा सुधार और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियानों में सक्रिय रहे हैं।

उनके जीवन और विचारों से प्रेरित होकर Aamir Khan की फिल्म 3 Idiots में दिखाया गया फुनसुक वांगडू का किरदार बनाया गया था।

हाल के वर्षों में वांगचुक लद्दाख से जुड़े संवैधानिक और राजनीतिक मुद्दों पर भी सक्रिय रहे हैं। उन्होंने लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय लोगों के अधिकारों को लेकर कई बार आंदोलन और प्रदर्शन किए हैं।

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