UP Assembly में सस्पेंड हुए सपा विधायक सचिन यादव कौन हैं? जानिए Education, Political Career और करोड़ों की संपत्ति

उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार (4 अगस्त) को सदन में हुए हंगामे के बीच समाजवादी पार्टी (सपा) के जसराना विधायक सचिन यादव को दो दिनों के लिए विधानसभा की कार्यवाही से निलंबित कर दिया गया। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने लगातार व्यवधान उत्पन्न करने और सदन के निर्देशों का पालन न करने के आरोप में यह कार्रवाई की। इसके बाद सचिन यादव एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गए।

विधानसभा की कार्यवाही के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और हंगामा देखने को मिला। इसी दौरान सचिन यादव पर सदन की कार्यवाही में बाधा डालने का आरोप लगा, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें अगले दो दिनों तक सदन की कार्यवाही में भाग लेने से रोकने का आदेश दिया।

कौन हैं सचिन यादव?

सचिन यादव उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले की जसराना विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक हैं। उनका जन्म वर्ष 1984 में हुआ था। उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा से एमए की पढ़ाई की और इसके बाद बीटेक की शिक्षा प्राप्त की। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और क्षेत्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

2022 में पहली बार बने विधायक

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में समाजवादी पार्टी ने सचिन यादव को जसराना सीट से उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी मनेवेंद्र लोधी को कड़े मुकाबले में हराकर पहली बार विधायक बनने का गौरव हासिल किया। जीत के बाद से वह विधानसभा और अपने क्षेत्र में सक्रिय जनप्रतिनिधि के रूप में लगातार चर्चा में रहे हैं।

सचिन यादव समय-समय पर विधानसभा में शिक्षा व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, पत्रकार सुरक्षा कानून और अपने विधानसभा क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दे उठाते रहे हैं। समाजवादी पार्टी उन्हें अपने युवा और सक्रिय नेताओं में शामिल करती है। उन्होंने कई अवसरों पर सरकार को स्थानीय और जनहित से जुड़े मुद्दों पर घेरने की भी कोशिश की है।

करोड़ों की संपत्ति को लेकर भी रहे चर्चा में

विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग को दिए गए शपथ पत्र के अनुसार, सचिन यादव ने अपनी घोषित संपत्ति 32 करोड़ रुपये से अधिक बताई थी। इसी कारण चुनाव के समय भी उनका नाम काफी सुर्खियों में रहा था।

निलंबन पर तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी

विधानसभा से दो दिनों के लिए निलंबित किए जाने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। सत्ता पक्ष इस कार्रवाई को विधानसभा के नियमों के पालन से जुड़ा कदम बता रहा है, जबकि समाजवादी पार्टी का आरोप है कि विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए यह कार्रवाई की गई है।

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