Ayodhya Ram Mandir: ट्रस्ट की बैठक में कई बड़े फैसले, लेकिन CEO और महासचिव के नाम पर अभी सस्पेंस, 2 सितंबर को होगा अंतिम निर्णय

अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बुधवार को आयोजित अहम बैठक में राम मंदिर के प्रबंधन, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। हालांकि ट्रस्ट के रिक्त पदों, नए महासचिव और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति पर अंतिम निर्णय नहीं हो सका। इन मुद्दों पर अब 2 सितंबर को होने वाली अगली ट्रस्ट बैठक में फैसला लिया जाएगा।

बैठक में श्रावण मास के दौरान अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की संभावित बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर परिसर में व्यवस्थाओं को और मजबूत बनाने पर सहमति बनी। ट्रस्ट ने दर्शन व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा करते हुए आवश्यक तैयारियां तेज करने का निर्णय लिया।

बैठक में चढ़ावे की गणना व्यवस्था और सुरक्षा प्रणाली पर भी चर्चा हुई। ट्रस्ट ने मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी सिस्टम की समीक्षा करते हुए संतोष व्यक्त किया कि चढ़ावा गणना कक्ष सहित सभी महत्वपूर्ण स्थानों के कैमरों की पहुंच पहले से ही सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों के पास उपलब्ध है। वहीं, सोने और चांदी के चढ़ावे की शुद्धता की जांच के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के सहायक संस्थान की टकसाल (मिंट) के साथ जारी व्यवस्था को आगे भी जारी रखने का निर्णय लिया गया।

चढ़ावा अनियमितता मामले में जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की अंतिम रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं होने के कारण इस विषय पर बैठक में कोई चर्चा नहीं की गई। साथ ही ट्रस्ट ने राम मंदिर से जुड़े सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों और न्यायालय के निर्देशों का भी संज्ञान लिया।

बैठक के दौरान स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के साथ हुए एमओयू और बैंक की जिम्मेदारियों पर भी चर्चा हुई। ट्रस्ट ने कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद बैंक की प्रतिक्रिया पर निराशा जताई और वित्त समिति को बैंक के साथ मौजूदा प्रक्रियाओं और संबंधों की समीक्षा कर आवश्यक निर्णय लेने का निर्देश दिया।

मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के चयन के लिए गठित समिति ने बड़ी संख्या में प्राप्त आवेदनों का हवाला देते हुए चयन प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक माह का अतिरिक्त समय मांगा, जिसे ट्रस्ट ने मंजूरी दे दी। इस बीच प्रशासनिक कार्यों के सुचारु संचालन के लिए एक सचिव नियुक्त करने की भी स्वीकृति दी गई।

ट्रस्ट ने यह भी कहा कि विभिन्न आरोपों और दुष्प्रचार के बावजूद राम मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो भगवान श्रीराम के प्रति लोगों की अटूट आस्था का प्रतीक है। ट्रस्ट ने देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं, संत समाज और अयोध्या के नागरिकों के प्रति आभार भी व्यक्त किया।

मंदिर की पारंपरिक पूजा-पद्धति की शुद्धता और धार्मिक परंपराओं को बनाए रखने के उद्देश्य से धार्मिक समिति का पुनर्गठन किया गया। इस समिति की अध्यक्षता स्वामी गोविंद देव गिरि करेंगे, जबकि विभिन्न पीठों और संत परंपराओं के प्रमुख संतों को सदस्य बनाया गया है। पूज्य युगपुरुष स्वामी परमानंद जी को भी समिति में शामिल किया गया है।

बैठक के बाद शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती ने बताया कि ट्रस्ट की मौजूदा संरचना में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मंदिर में दर्शन व्यवस्था और अन्य प्रशासनिक कार्यों की निगरानी के लिए एक प्रबंध समिति का गठन किया जाएगा तथा नए CEO की नियुक्ति भी की जाएगी। हालांकि ट्रस्ट के रिक्त सदस्य पदों, महासचिव और CEO के नाम पर इस बैठक में सहमति नहीं बन सकी। उन्होंने बताया कि इन सभी मुद्दों पर अंतिम निर्णय अब 2 सितंबर को होने वाली अगली बैठक में लिया जाएगा।

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