अयोध्या के भव्य राम मंदिर परिसर में रामनवमी से पहले धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम लगातार जारी है। इसी कड़ी में गुरुवार (26 मार्च) को परकोटे में स्थित भगवान सूर्य देव मंदिर के शिखर पर वैदिक विधि-विधान के साथ ध्वजारोहण किया गया, जिसे रामनवमी से पहले अत्यंत शुभ संकेत माना जा रहा है।
सूर्य देव मंदिर के शिखर पर विधि-विधान से ध्वजारोहण
रामलला मंदिर परिसर इन दिनों आध्यात्मिक आयोजनों से गुंजायमान है। सूर्य देव मंदिर के शिखर पर आयोजित ध्वजारोहण समारोह में अयोध्या के करीब 20 वरिष्ठ साधु-संत शामिल हुए। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक परंपराओं के अनुसार संपन्न हुए इस अनुष्ठान ने पूरे परिसर को भक्तिमय वातावरण में बदल दिया।
जानकारी के मुताबिक, यह आयोजन इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि रामनवमी पर भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के अवसर पर सूर्य तिलक का भव्य कार्यक्रम प्रस्तावित है।
राम कुल के पूर्वज माने जाते हैं सूर्य देव
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान सूर्य देव को भगवान श्रीराम के कुल का पूर्वज माना जाता है। इसी कारण सूर्य मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण का विशेष आध्यात्मिक महत्व बताया जा रहा है। रामनवमी से ठीक पहले हुए इस आयोजन को श्रद्धालु शुभ संकेत के रूप में देख रहे हैं।
राम मंदिर ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव ने बताया कि मंदिर परिसर में कुल आठ शिखर बनाए गए हैं। इनमें मुख्य मंदिर, माता अन्नपूर्णा मंदिर और अब सूर्य देव मंदिर के शिखरों पर ध्वजारोहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
पहले भी हो चुके हैं प्रमुख ध्वजारोहण समारोह
गौरतलब है कि 25 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर के मुख्य शिखर पर ध्वजारोहण कर मंदिर की पूर्णता का संदेश दिया था। इसके बाद 31 दिसंबर को प्रतिष्ठा द्वादशी के अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अन्नपूर्णा मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण किया था।
राम मंदिर परिसर के परकोटे में शिव, गणेश, हनुमान, दुर्गा और सूर्य सहित कई देवी-देवताओं के मंदिर स्थापित हैं, जहां चरणबद्ध तरीके से धार्मिक अनुष्ठान जारी हैं। रामनवमी पर होने वाले सूर्य तिलक कार्यक्रम को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है।