Ram Mandir Donation Theft: दान चोरी मामले में बड़ा एक्शन तय? 100 कर्मचारियों पर लटक सकती है नौकरी, SIT जांच में बढ़ी सख्ती

अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच के बीच अब बड़े प्रशासनिक एक्शन की तैयारी की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच के दायरे में मंदिर से जुड़े करीब 100 कर्मचारी हैं, जिनकी भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि ये कर्मचारी सिफारिश के आधार पर नियुक्त किए गए थे और जांच रिपोर्ट के आधार पर इनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी जांच के दौरान इन कर्मचारियों से पूछताछ भी की जा चुकी है। यदि अंतिम रिपोर्ट में उनकी भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो उन्हें सेवा से हटाने का फैसला लिया जा सकता है। फिलहाल जांच एजेंसी इस पूरे मामले की गहन समीक्षा कर रही है।

ट्रस्ट और एजेंसियों के जरिए हुई नियुक्तियां भी जांच के दायरे में

जानकारी के अनुसार, राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कर्मचारियों के अलावा कुछ निजी एजेंसियों के माध्यम से भी कई नियुक्तियां की गई थीं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इनमें से कुछ नियुक्तियां ट्रस्ट से जुड़े लोगों की सिफारिश पर हुई थीं। इन कर्मचारियों को सुरक्षा कार्यालय, सफाई व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सहायता जैसे विभिन्न कार्यों के लिए तैनात किया गया था।

सूत्रों का कहना है कि समीक्षा के दौरान कुछ कर्मचारियों को गैर-जरूरी भी माना गया है। ट्रस्ट के नए पदाधिकारी इन नियुक्तियों और उनकी आवश्यकता का मूल्यांकन कर रहे हैं।

दान की गिनती में लागू की गई दोहरी सुरक्षा व्यवस्था

दान चोरी का मामला सामने आने के बाद श्री राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती की पूरी प्रक्रिया को और अधिक सुरक्षित बनाया गया है। अब चढ़ावे की गणना के दौरान द्विस्तरीय निगरानी व्यवस्था लागू की गई है। पुलिस के साथ-साथ निजी सुरक्षा एजेंसियों को भी इस प्रक्रिया की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

गणना कक्ष में प्रवेश से पहले कर्मचारियों की दो स्तर पर जांच की जा रही है। इसके अलावा चढ़ावे की गिनती पूरी होने के बाद बाहर निकलते समय भी कर्मचारियों की तलाशी ली जा रही है। सभी कर्मचारियों के लिए परिचय पत्र साथ रखना अनिवार्य कर दिया गया है।

जानकारी के मुताबिक, इस पूरी व्यवस्था की निगरानी के लिए 23 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता की पुनरावृत्ति न हो।

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