Ram Mandir Donation Scam: बाथरूम बना ‘सेफ ज़ोन’? चढ़ावे की कथित हेराफेरी का तरीका आया सामने, SIT जांच में बड़े खुलासे के संकेत

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित गड़बड़ी को लेकर चल रही जांच के बीच एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, दान की गिनती के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की एक बड़ी खामी का फायदा उठाकर कथित तौर पर हेराफेरी की जाती थी। इस मामले की जांच फिलहाल एसआईटी कर रही है और कई अहम पहलुओं की पड़ताल जारी है।

बताया जा रहा है कि मंदिर प्रशासन को कुछ समय पहले ही इस संभावित गड़बड़ी की जानकारी मिल गई थी और इसके बाद सबूत जुटाने की कोशिश शुरू की गई थी।

कैसे होती थी कथित तौर पर दान की हेराफेरी?

सूत्रों के अनुसार, जिस कक्ष में दान राशि की गिनती होती थी, वहां आने और काम खत्म होने के बाद बाहर निकलने वाले कर्मचारियों की जांच की जाती थी। हालांकि गिनती के दौरान यदि कोई व्यक्ति बीच में बाहर जाता था, तो उसकी तलाशी नहीं होती थी।

यही व्यवस्था कथित तौर पर गड़बड़ी की सबसे बड़ी वजह बनी। बताया जा रहा है कि कुछ लोग बाथरूम जाने का बहाना बनाकर गिनती कक्ष से बाहर निकलते थे और इसी दौरान नकदी को छिपा देते थे।

बाथरूम के रास्ते अपनाया जाता था कथित तरीका

जानकारी के मुताबिक, दान गिनती कक्ष से करीब 50 मीटर की दूरी पर बाथरूम स्थित था। बाथरूम जाने और वापस आने वाले लोगों की नियमित जांच नहीं होती थी।

सूत्रों का दावा है कि कथित तौर पर कुछ लोग गिनती के दौरान पैसा बाथरूम या आसपास के स्थानों पर छिपा देते थे। बाद में जब गिनती का काम पूरा हो जाता और अंतिम सुरक्षा जांच समाप्त हो जाती, तब वे दोबारा वहां जाकर छिपाई गई रकम निकाल लेते थे।

हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

चंपत राय को पहले ही मिल गई थी जानकारी?

सूत्रों के अनुसार, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को इस संभावित अनियमितता की जानकारी पहले ही मिल गई थी। बताया जा रहा है कि उन्हें कुछ गतिविधियों पर संदेह था और वे ठोस सबूत जुटाने का प्रयास कर रहे थे।

इसी वजह से मामले को लेकर आंतरिक स्तर पर भी निगरानी बढ़ाई गई थी। अब एसआईटी जांच के दौरान इन पहलुओं की भी समीक्षा की जा रही है।

गुप्त दान और सोने के चढ़ावे पर भी उठे सवाल

जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। बताया जा रहा है कि यदि कोई श्रद्धालु बिना रसीद के सीधे दान पात्र में सोना, आभूषण या अन्य कीमती वस्तुएं डाल देता था, तो उनके रिकॉर्ड और निगरानी की व्यवस्था पूरी तरह मजबूत नहीं थी।

सूत्रों का कहना है कि इसी कारण कुछ कीमती वस्तुओं में कथित तौर पर हेरफेर की आशंका जताई जा रही है। जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि गुप्त दान के लिए पर्याप्त सुरक्षा और दस्तावेजी व्यवस्था मौजूद थी या नहीं।

पहली बार बोले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी पहली बार सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी है। अयोध्या दौरे के दौरान उन्होंने कहा कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाएगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “सभी राम भक्तों से अपील है कि अयोध्या के बारे में जो सुनने को मिला, हमने ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी जांच बैठाई है. एसआईटी जांच दूध का दूध और पानी का पानी करके रहेगी.”

जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं सबकी नजरें

राम मंदिर में दान और चढ़ावे से जुड़ा यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मुद्दे में अब सभी की नजरें एसआईटी जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।

जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सामने आए आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या वास्तव में दान राशि तथा कीमती चढ़ावे में किसी प्रकार की अनियमितता हुई थी।

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