अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और अनियमितताओं के आरोपों को लेकर विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने कड़ा रुख अपनाया है। वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा है कि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच होनी चाहिए तथा जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए, उसे कानून के अनुसार कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने जांच पूरी होने से पहले किसी की छवि खराब करने की कोशिशों से भी बचने की अपील की है।
जांच पूरी होने तक निष्कर्ष पर न पहुंचने की अपील
मीडिया से बातचीत के दौरान आलोक कुमार ने कहा, ‘अभी इस मामले की जांच जारी है, तो हमें जांच के नतीजों का इंतजार किया जाना चाहिए और किसी की भी प्रतिष्ठा को खराब करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।’ उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण और उसके कार्यों के लिए देशभर के करोड़ों परिवारों ने श्रद्धा और आस्था के साथ दान दिया है, इसलिए इस धन से जुड़े किसी भी मामले की गंभीरता से जांच होना आवश्यक है।
SIT गठन को लेकर जताई संतुष्टि
वीएचपी अध्यक्ष ने कहा कि आरोप सामने आने के तुरंत बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर विशेष जांच दल (SIT) के गठन की मांग की थी। इस कदम पर संतोष जताते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं इस बात से संतुष्ट हूं कि जैसे ही इस मामले को लेकर आरोप लगाए जाने लगे, वैसे ही श्री राम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखकर जांच के लिए एक एसआईटी (SIT) गठित करने का आग्रह किया।’
चंपत राय सबसे पहले SIT के सामने हुए पेश
आलोक कुमार ने बताया कि एसआईटी की टीम अयोध्या पहुंच चुकी है और जांच प्रक्रिया शुरू हो गई है। उन्होंने कहा, ‘एसआईटी की टीम अयोध्या पहुंच चुकी है. चंपत राय सबसे पहले एसआईटी के सामने पेश हुए और उन्होंने कहा कि महासचिव होने के नाते यह उनकी पहली जिम्मेदारी है. हम चाहते हैं कि इस मामले में गहनता से जांच की जाए, न कि सिर्फ सहानुभूति के आधार पर।’
दोषियों की पहचान कर सख्त सजा देने की मांग
वीएचपी अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि यदि जांच में किसी भी प्रकार का अपराध, विश्वासघात या लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून के मुताबिक दोषियों की पहचान कर उन्हें कठोर सजा मिलनी चाहिए, चाहे उनका पद या पहचान कुछ भी हो। हालांकि उन्होंने यह भी दोहराया कि जांच रिपोर्ट आने से पहले किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराना उचित नहीं है।