पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में मंगलवार को बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और स्थानीय दावों के अनुसार, मुजफ्फराबाद, रावलकोट, कोटली, भिंबर, ददयाल, पालंदरी और सुधनोति समेत कई क्षेत्रों में लोगों ने बंद और प्रदर्शन का आह्वान किया। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा प्रतिष्ठान के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को लेकर सड़कें जाम कर दीं।
रावलकोट और अन्य शहरों में प्रदर्शन तेज
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रावलकोट में सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और मुख्य मार्गों पर प्रदर्शन शुरू कर दिया। वहीं भिंबर से रावलकोट की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई।
स्थानीय दावों के अनुसार, कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें भी हुईं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे गए और बल प्रयोग किया गया, जबकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
कई शहरों में बंद का असर
प्रदर्शनों के साथ-साथ कई शहरों में बंद का भी व्यापक असर देखने को मिला। मुजफ्फराबाद, कोटली, रावलकोट, भिंबर और ददयाल सहित कई इलाकों में बाजार और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे।
पालंदरी और सुधनोति क्षेत्रों से सामने आई तस्वीरों और रिपोर्टों में बड़ी संख्या में लोगों को विरोध प्रदर्शन करते हुए देखा गया। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों के समर्थन में रैलियां और सभाएं आयोजित कर रहे हैं।
38 मांगों को लेकर आंदोलन
प्रदर्शन कर रहे समूहों का कहना है कि वे कुल 38 मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इनमें सस्ती बिजली, आटा, चावल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं।
प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि क्षेत्र में मौजूद जलविद्युत परियोजनाओं से उत्पन्न संसाधनों का लाभ स्थानीय लोगों को भी मिलना चाहिए और उन्हें बिजली रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
संसद की 12 आरक्षित सीटों को लेकर भी नाराजगी
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में से एक पीओके की विधानसभा में मौजूद 12 शरणार्थी सीटों को लेकर भी है। आंदोलन कर रहे लोगों का कहना है कि इन सीटों की मौजूदा व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
उनका दावा है कि इन सीटों का प्रतिनिधित्व ऐसे लोगों द्वारा किया जाता है जो वर्तमान में पीओके के बाहर पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रहते हैं। इसी मुद्दे को लेकर राजनीतिक प्रतिनिधित्व और निर्वाचन व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव
मुजफ्फराबाद के नीलम पुल क्षेत्र सहित कुछ इलाकों से प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तनाव की खबरें सामने आई हैं। स्थानीय रिपोर्टों में झड़पों और स्थिति के तनावपूर्ण होने का उल्लेख किया गया है।
हालांकि, घटनाओं से जुड़े कई दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और आधिकारिक स्तर पर सभी आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया भी सामने नहीं आई है।
पाकिस्तानी प्रशासन पर लगाए जा रहे आरोप
प्रदर्शनकारी समूहों और कुछ स्थानीय संगठनों ने पाकिस्तान सरकार, सेना और खुफिया एजेंसियों की भूमिका को लेकर कई आरोप लगाए हैं। इनमें राजनीतिक हस्तक्षेप, स्थानीय अधिकारों की अनदेखी और प्रशासनिक नियंत्रण से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।
इन आरोपों और दावों पर पाकिस्तान सरकार या संबंधित संस्थाओं की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है। फिलहाल क्षेत्र के कई हिस्सों में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और प्रदर्शन जारी हैं।