नई दिल्ली। जिस ‘इंडिया आउट’ अभियान के दम पर मालदीव के राष्ट्रपति मुहम्मद मुइज्जू सत्ता में आए थे, अब उन्हीं के शासनकाल में भारत के समर्थन में सुर पूरी तरह बदल चुके हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित मालदीव दौरे से पहले वहां की सरकार और राजनयिकों के बयानों में भारत की उदारता और मदद का खुला गुणगान हो रहा है।
‘भारत का दिल बहुत बड़ा है, उसके बिना हमारा काम नहीं चलेगा’
मालदीव के पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने कहा:
“भारतीयों का दिल बहुत बड़ा है… वे बहुत उदार हैं।
भारत ने जब भी हमारी जरूरत पड़ी, बिना देर किए मदद की।
विकास हो या आपदा प्रबंधन, भारत ने कभी साथ नहीं छोड़ा।
उसके बिना मालदीव का काम नहीं चल सकता।”
‘इंडिया आउट’ से शुरू हुआ था विवाद
करीब दो साल पहले जब मुइज्जू राष्ट्रपति बने थे, तो उन्होंने ‘इंडिया आउट’ अभियान को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया।
75 भारतीय सैनिकों की वापसी की मांग उठाई गई, जो चिकित्सा आपात स्थितियों में तैनात थे।
मुइज्जू ने अपनी पहली विदेश यात्रा भारत की बजाय तुर्की और चीन की ओर की और वहां 20 समझौते किए।
इससे स्पष्ट था कि वे भारत से दूरी बनाना चाहते थे।
भारत की शांति कूटनीति ने पलट दिए समीकरण
पूर्व राजनयिक राजीव भाटिया के मुताबिक,
“भारत ने स्थिति को परिपक्वता और व्यावहारिकता से संभाला।
कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं दी, बल्कि सहयोग की नीति पर डटा रहा।
विदेश मंत्री का मालदीव दौरा, फिर मुइज्जू का भारत आना — रिश्तों में गर्माहट लौट आई।”
चीन से मुइज्जू की उम्मीदें पूरी नहीं हुईं, जबकि भारत का भरोसेमंद रवैया उनके लिए ज्यादा फायदेमंद साबित हुआ।
ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट बना रिश्तों की मिसाल
शाहिद ने भारत की आर्थिक सहायता की भी खुलकर सराहना की।
“भारत के सहयोग से ही ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट संभव हुआ है,
जो मालदीव का सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है और अगले साल तक पूरा होने की उम्मीद है।”
पीएम मोदी का ऐतिहासिक दौरा: नई दिशा, नई शुरुआत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 और 26 जुलाई को मालदीव की राजधानी माले जाएंगे।
वह मालदीव के स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे और
राष्ट्रपति मुइज्जू की ओर से मेजबानी पाने वाले पहले विदेशी राष्ट्राध्यक्ष बनेंगे।
इस दौरान पीएम मोदी कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे, जिन्हें भारत ने वित्तपोषित किया है।
इसके अलावा द्विपक्षीय बातचीत में समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद, व्यापार और क्षेत्रीय सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा होगी।
भारत और मालदीव के रिश्तों में जो कड़वाहट मुइज्जू की सत्ता में आने के साथ आई थी,
अब वही रिश्ते नए भरोसे, व्यावहारिकता और सहयोग की ओर लौट रहे हैं।
‘इंडिया आउट’ की जगह अब ‘इंडिया फर्स्ट पार्टनर’ की भावना दिख रही है।