
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गुरुवार को राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के कामकाज में सुधार के तरीकों पर विचार करने के लिए जिस उच्च स्तरीय समिति की घोषणा की थी, उसका गठन कर दिया गया है।
इसमें कुछ जाने-माने शिक्षाविद और टेक्नोक्रेट शामिल हैं। NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और यूजीसी-नेट परीक्षा को रद्द करने को लेकर एजेंसी और सरकार आलोचनाओं के घेरे में हैं। इन दो महत्वपूर्ण परीक्षाओं में 30 लाख से अधिक छात्र शामिल हुए थे।
अब कैसे रोका जाए पेपर लीक, क्या होने चाहिए सुधार? इसको लेकर एक समिति गठित की गई है। शिक्षा मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि उसने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के माध्यम से परीक्षाओं का पारदर्शी, सुचारू और निष्पक्ष संचालन सुनिश्चित करने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व प्रमुख के. राधाकृष्णन के नेतृत्व में विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है। डॉ. के राधाकृष्णन आईआईटी कानपुर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के वर्तमान अध्यक्ष हैं।
पैनल में दिल्ली स्थित एम्स के पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया, हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति बी.जे. राव, आईआईटी दिल्ली में छात्र मामलों के डीन आदित्य मित्तल और आईआईटी मद्रास के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के पूर्व प्रोफेसर राममूर्ति के. शामिल हैं। मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग ने कहा कि सात सदस्यीय समिति परीक्षा प्रक्रिया के तंत्र में सुधार, डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल में सुधार और एनटीए की संरचना और कार्यप्रणाली को लेकर सिफारिशें करेगी। समिति दो महीने के भीतर मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
केंद्र सरकार ने शनिवार को बताया कि शिक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव गोविंद जायसवाल और पीपल स्ट्रॉन्ग के सह-संस्थापक और कर्मयोगी भारत के बोर्ड सदस्य पंकज बंसल शेष दो सदस्य हैं। गुरुवार को प्रधान ने कहा था, “सरकार एक उच्च स्तरीय समिति भी गठित कर रही है। यह समिति एनटीए की संरचना, इसकी कार्यप्रणाली, परीक्षा प्रक्रिया, पारदर्शिता और डेटा तथा सुरक्षा प्रोटोकॉल में सुधार के बारे में सिफारिशें देगी। हम शून्य त्रुटि वाली परीक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।”