TMC में टूट का खतरा या बड़ा राजनीतिक मोड़? स्पीकर ओम बिरला ने अभिषेक बनर्जी को बुलाया, बढ़ी सियासी हलचल

पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की एक पहल ने नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। पार्टी में बढ़ती बगावत और सांसदों के अलग होने के दावों के बीच स्पीकर ने टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को 19 जून को मुलाकात के लिए समय दिया है। इस बैठक को पार्टी के भविष्य और संसदीय स्थिति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

19 जून को स्पीकर से मिलेंगे अभिषेक बनर्जी

सूत्रों के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला चाहते हैं कि अभिषेक बनर्जी पार्टी में कथित बगावत और सांसदों के अलग होने के घटनाक्रम पर अपना पक्ष स्पष्ट करें। इसी उद्देश्य से उन्हें 19 जून को बैठक के लिए बुलाया गया है।

राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को TMC के लिए महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष ने उसके संगठनात्मक और संसदीय भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

बागी सांसदों ने किया था नए दल में विलय का ऐलान

हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस के कुछ बागी सांसदों ने पूर्वोत्तर की राजनीतिक पार्टी नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल होने की घोषणा की थी। यह दल त्रिपुरा का एक पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष 2022 में हुई थी।

2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में पार्टी ने दो सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, हालांकि दोनों उम्मीदवार अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए थे। इसके बावजूद TMC के असंतुष्ट नेताओं का इस दल के साथ जाने का फैसला राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।

विधानसभा चुनाव के बाद बढ़ा असंतोष

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद से तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष की खबरें लगातार सामने आती रही हैं। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और सांसदों ने संगठन की कार्यशैली और नेतृत्व को लेकर सवाल उठाए हैं।

कभी संसद के दोनों सदनों में लगभग 40 सांसदों के साथ मजबूत विपक्षी ताकत मानी जाने वाली TMC अब अपने सांसदों के लगातार अलग होने की खबरों के कारण दबाव में दिखाई दे रही है।

भूपेंद्र यादव से भी मिले थे बागी सांसद

रिपोर्ट के मुताबिक, बागी सांसदों का एक समूह, जिसकी अगुवाई सांसद शताब्दी रॉय कर रही थीं, लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात से पहले बीजेपी नेता और पश्चिम बंगाल चुनाव प्रभारी भूपेंद्र यादव से भी मिला था।

इस मुलाकात ने राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया है। विपक्षी दल इसे टीएमसी के अंदर गहराते संकट का संकेत मान रहे हैं, जबकि पार्टी नेतृत्व स्थिति को संभालने की कोशिश में जुटा है।

राज्यसभा में भी दिखा असर

तृणमूल कांग्रेस में असंतोष का असर राज्यसभा तक भी पहुंचा है। हाल ही में प्रकाश चिक बराइक और कोयल मल्लिक ने राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इससे पहले सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव भी अपना इस्तीफा सौंप चुके हैं।

सुखेंदु शेखर रॉय ने इस्तीफे के बाद पार्टी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए थे। वहीं सुष्मिता देव ने पार्टी छोड़ने के बाद अपने गृह राज्य असम की राजनीति पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही थी।

अभिषेक की बैठक पर टिकी नजरें

अब राजनीतिक निगाहें 19 जून को होने वाली अभिषेक बनर्जी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की मुलाकात पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद पार्टी में जारी विवाद और सांसदों की स्थिति को लेकर कुछ स्पष्टता सामने आ सकती है।

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