कानपुर में पीडीए के सम्मेलन में विधायकों और जिलाध्यक्ष में कहासुनी, आपस में भिड़े समर्थक

 

यूपी के कानपुर की सीसामऊ विधानसभा सीट पर होने वाले उपुचनाव को लेकर शुक्रवार को सपा का पहला पीडीए सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए जिलाध्यक्ष और विधायक भी पहुंचे।
इस दौरान भारी संख्या में समर्थक भी सम्मेलन में पहुंच गए। मंच पर मौजूद प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल के सामने जिलाध्यक्ष ने विधायकों पर गंभीर आरोप लगा दिए। इसके बाद विधायक और जिलाध्यक्ष के बीच कहासुनी होने लगी। देखते ही देखते दोनों ओर से समर्थक भी आपस में भिड़ गए।कानपुर की सीसामऊ सीट पर उपचुनाव होने हैं। इस सीट पर सपा ने नसीम सोलंकी को प्रत्याशी बनाया है। नसीम सोलंकी महाराजगंज जेल में बंद पूर्व विधायक इरफान सोलंकी की पत्नी हैं। नसीम सोलंकी ने ही पहली बार पीडीए की जनसभा का आयोजन किया। पीडीए की इस जनसभा में शामिल होने के लिए सपा प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल भी कानपुर पहुंचे थे। सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए सपा विधायक अमिताभ बाजपेई, कैंट विधायक मोहम्मद हसन रूमी, पूर्व सांसद राजाराम पाल, इटावा सांसद जितेंद्र दोहरे आदि पहुंचे थे। जानकारी के अनुसार जनसभा के दौरान जिलाध्यक्ष ने अचानक से खड़े होकर विधायकों पर गंभीर आरोप लगाए दिए। जिलाध्यक्ष का जवाब सुनते ही विधायक भड़क गए और कहासुनी शुरू हो गई। इधर जिलाध्यक्ष और विधायक के बीच कहासुनी होते देख दोनों के समर्थक आपस में भिड़ गए।22 अक्तूबर तक प्रत्याशी का ऐलान कर सकती है भाजपा

भाजपा ने अभी इस सीट पर प्रत्याशी का ऐलान नहीं किया है। हालांकि सीसामऊ सीट पर प्रत्याशी चयन को लेकर पहली बैठक राष्ट्रीय नेतृत्व कर चुका है। पैनल में तीन नाम भी तय किए हैं। भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक में प्रत्याशी पर अंतिम मुहर लगेगी। पार्टी सूत्रों का दावा है कि 22 अक्तूबर तक प्रत्याशी तय हो जाएगा। भाजपा जिलाध्यक्ष दीपू पांडेय का कहना है कि पार्टी का प्रत्याशी कमल है। इसको लेकर तैयारियां अंतिम चरण में है। राष्ट्रीय नेतृत्व जिसे तय करेगा, उसे जिताने का काम संगठन पूरा करेगा।सीसामऊ में 1.11 लाख मुस्लिम तो 1.14 लाख दलित व ब्राह्मण वोटर

सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र में लगभग 2.70 लाख मतदाता हैं। इसमें 1.11 लाख मुस्लिम हैं। दलित मतदाताओं की संख्या लगभग 59 हजार है तो ब्राह्मण मतदाता 55 हजार। दोनों को मिलाकर कुल 1.14 लाख मतदाता हैं। इसके बाद छह हजार क्षत्रिय,12000 ओबीसी, 20 हजार कायस्थ तो पांच-छह हजार सिंधी पंजाबी हैं। इस वजह से भाजपा का पूरा ध्यान दलित, ब्राह्मण के अलावा अन्य जातियों पर लगा है।

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