‘आज मार देंगे…’ पप्पू यादव का बड़ा दावा, सुबह से 4 बार मिली Death Threat; बोले- ‘किस बात की माफी मांगूं?’

पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने दावा किया है कि उन्हें रविवार सुबह से अब तक चार बार जान से मारने की धमकी मिली है। संसद परिसर में उनके हालिया विरोध प्रदर्शन के बाद यह मामला सामने आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि फोन करने वाले लोग उनसे माफी मांगने का दबाव बना रहे हैं और बाहर निकलने पर जान से मारने की धमकी दे रहे हैं।

मीडिया से बातचीत में पप्पू यादव ने कहा, “आज सुबह से लेकर अभी तक चार धमकी भरे फोन आ चुके हैं.” उन्होंने बताया कि फोन करने वाले कह रहे हैं, “तुम निकलोगे तो तुम्हें मार देंगे, तुम माफी मांगो.”

धमकियों को लेकर पप्पू यादव ने कहा, “समझ नही आ रहा कि किस बात की माफी मांगे. चोरी आप कर रहे हो. आप लोग कह रहे हैं जिंदा जला देंगे. गला काट देंगे तो क्या कोई साधु संत ऐसा करता है.” उन्होंने आगे कहा कि चंपत राय पर चांदी और सोना चोरी के आरोप लगे हैं तथा कुछ लोगों द्वारा सिर काटकर लाने जैसी बातें कही जा रही हैं। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि “हम सभी संतो का सम्मान करते हैं.”

‘हमने किसी का नाम नहीं लिया’

पप्पू यादव ने अपने विरोध प्रदर्शन का बचाव करते हुए कहा, “हमने किसी का नाम नहीं लिया. हमने चंदा चोरी का केवल एक नाट्य रुपांतरण किया था. आप सबको गाली दीजिये कोई बात नहीं, लेकिन सदन के बाहर कोई प्रदर्शन करे तो धमकी दी जा रही हैं.”

उन्होंने आगे कहा, “सुबह से 4 बार फोन पर धमकी मिल चुकी है कि आज मुझे मार देंगे. मुझे समझ नहीं आता कि किस बात को लेकर माफी मांगू. चोरी आप कर रहे हो, आम आदमी की आस्था के साथ खिलवाड़ आप कर रहे हो, भगवान के साथ गद्दारी आप कर रहे हो.”

बीजेपी सांसदों ने विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया

इस बीच बीजेपी सांसद संजय जायसवाल और पार्टी के मुख्य सचेतक ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को नियम 222 और 223 के तहत पप्पू यादव के खिलाफ विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना का नोटिस सौंपा है। यह नोटिस 31 जुलाई 2026 को संसद परिसर में सनातन धर्म के कथित अपमान से जुड़े मामले को लेकर दिया गया है।

नोटिस पर भी दिया जवाब

विशेषाधिकार नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए पप्पू यादव ने कहा, “आप सदन में नेहरू, इंदिरा गांधी या मुलायम सिंह को गाली दे सकते हैं. आप जिसे चाहें उसे गाली दे सकते हैं, यह ठीक है.”

उन्होंने आगे कहा, “आप सदन में विपक्ष के नेता (एलओपी) को बोलने से रोक सकते हैं, यह ठीक है, लेकिन जब कोई सदन के बाहर गरिमापूर्ण तरीके से विरोध करता है, तो ‘विशेषाधिकार’ का सवाल ही कहां उठता है? अगर अध्यक्ष पूछेंगे, तो मैं निश्चित रूप से अपना पक्ष रखूंगा. मैंने अध्यक्ष को पत्र भी लिखा है.”

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