मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब पाकिस्तान पर साफ दिखाई दे रहा है। देश गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रहा है और उसके पास कच्चे तेल का भंडार बेहद सीमित रह गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़कर 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी हैं। खासकर हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर पैदा हुए तनाव और संभावित नाकेबंदी ने पाकिस्तान की स्थिति और अधिक खराब कर दी है।
पेट्रोलियम मंत्री का बड़ा बयान: “हमारे पास केवल 5 से 7 दिन का तेल है”
समा टीवी को दिए एक इंटरव्यू में पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने स्थिति को बेहद गंभीर बताया। उन्होंने साफ कहा, “हमारे पास कोई रणनीतिक तेल का भंडार नहीं है. हमारे पास केवल व्यावसायिक भंडार है.” उन्होंने आगे बताया कि इस समय देश के पास सिर्फ 5 से 7 दिन का तेल बचा हुआ है, जिससे आने वाले दिनों में संकट और गहरा सकता है।
ईंधन की कीमतों में भारी उछाल, जनता सड़कों पर
तेल संकट का सीधा असर आम जनता पर पड़ा है। पाकिस्तान में ईंधन की कीमतों में करीब 42.7 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है। पेट्रोल की कीमत PKR 321.17 से बढ़कर PKR 458.41 तक पहुंच गई है। बढ़ती कीमतों और किल्लत के कारण लोग सड़कों पर उतरकर विरोध कर रहे हैं। वहीं भारत में स्थिति अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई है, जहां पेट्रोल की कीमत करीब 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर है।
डीजल महंगा, लेवी में बदलाव का फैसला
पेट्रोलियम मंत्री मलिक ने बताया कि डीजल की कीमतें 3 से 4 गुना तक बढ़ चुकी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने डीजल पर लेवी को शून्य कर दिया है और इसका पूरा बोझ पेट्रोल पर डालने का फैसला लिया गया है। साथ ही उन्होंने यह भी खुलासा किया, “हमने IMF के साथ गुप्त बातचीत की और उन्हें लेवी में 80 रुपये प्रति लीटर की कमी करने के लिए राजी किया.”
भारत से तुलना पर क्या बोले मंत्री
भारत के साथ तुलना करते हुए मलिक ने कहा कि भारत के पास 60 से 70 दिनों का संयुक्त रणनीतिक और व्यावसायिक तेल भंडार है। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत के पास लगभग 600 अरब डॉलर का भंडार है, जिससे वह ऐसे संकटों का बेहतर सामना कर सकता है।
भारत में स्थिति स्थिर, पर्याप्त भंडार मौजूद
दूसरी ओर भारत में फिलहाल तेल को लेकर स्थिति नियंत्रण में है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार देश के पास करीब 60 दिनों का तेल भंडार उपलब्ध है। इसके अलावा भारत के पास लगभग 8 लाख टन एलपीजी का स्टॉक भी मौजूद है, जिससे आपूर्ति प्रभावित होने की संभावना कम है।